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कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद हटाई जाएगी? दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार ने बताई वजह

दिल्ली के कृषि भवन परिसर में बनी करीब 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने इसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए जरूरी बताया है।
कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद हटाई जाएगी? दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार ने बताई वजह
कृषि भवन की 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद हटाई जाएगी?

नई दिल्ली। सरकार का कहना है कि सरकारी परिसरों में किसी स्थायी धार्मिक ढांचे के लिए जगह आरक्षित नहीं की जा सकती। वहीं, हाईकोर्ट ने सवाल किया है कि क्या सरकारी दफ्तरों में किसी भी धर्म के पूजा स्थल पर रोक लगाने वाले नियम मौजूद हैं। मस्जिद कमेटी ने इसके आसपास नमाज के लिए दूसरी जगह देने की मांग की है।

केंद्र ने कहा-सरकारी परिसर में धार्मिक ढांचा रखना उचित नहीं

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि कृषि भवन और केंद्रीय सचिवालय सरकारी कामकाज के लिए बनाए गए परिसर हैं। यहां किसी स्थायी धार्मिक ढांचे को बनाए रखना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुरूप नहीं है। सरकार के मुताबिक, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन की जगह कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की नई इमारतें बनाई जानी हैं। यह राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है, इसलिए मस्जिद को हटाना जरूरी है।

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सरकारी परिसर में पूजा स्थल पर रोक का क्या नियम है?-हाईकोर्ट

सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस अनिश दयाल ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसे कोई नियम हैं, जिनके तहत सरकारी परिसरों में किसी भी धर्म के पूजा स्थल बनाने या उन्हें बनाए रखने पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि अगर किसी धार्मिक स्थल को हटाया जाता है तो उसके बदले दूसरी जगह देने को लेकर क्या प्रावधान हैं। जस्टिस दयाल ने कहा कि सरकार के बयान का मतलब और उसका असर समझना जरूरी है।

'मस्जिद के लिए दूसरी जगह देने को मजबूर नहीं किया जा सकता'

केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकारी जमीन पर किसी धार्मिक स्थल के लिए स्थायी रूप से जगह आरक्षित नहीं की जा सकती। सरकार को कृषि भवन या केंद्रीय सचिवालय परिसर में मस्जिद के लिए दूसरी जगह उपलब्ध कराने के लिए मजबूर भी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र से इस संबंध में लागू नियमों और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि क्या सरकारी परिसरों में किसी भी समुदाय के लिए प्रार्थना की जगह नहीं हो सकती।

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मस्जिद कमेटी ने सितंबर में दाखिल की थी याचिका

कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली कमेटी ने सितंबर में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कमेटी को आशंका थी कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत मस्जिद को गिराया जा सकता है। याचिका में CPWD और NDMC को मस्जिद हटाने या गिराने से रोकने की मांग की गई है। कमेटी ने कहा है कि अगर नई इमारत के निर्माण के कारण मस्जिद को मौजूदा जगह पर रखना संभव नहीं है, तो आसपास ही नमाज पढ़ने के लिए उचित और पर्याप्त जगह दी जाए।

'आजादी के बाद से कर्मचारी यहां पढ़ते आ रहे नमाज'

मस्जिद कमेटी का कहना है कि आजादी के बाद से कृषि भवन और आसपास के सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी यहां नमाज पढ़ते रहे हैं। कमेटी के मुताबिक, मस्जिद लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों के लिए नमाज अदा करने की जगह रही है। इसी आधार पर उसने अदालत से मस्जिद को हटाने से रोकने और जरूरत पड़ने पर आसपास वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने की मांग की है। कमेटी चाहती है कि नमाज पढ़ने की व्यवस्था प्रभावित न हो।

23 नवबंर को होगी अगली सुनवाई 

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दलील दी कि इंडिया गेट के पास शाही मस्जिद जाब्ता गंज मौजूद है, जो कृषि भवन से करीब दो किलोमीटर के दायरे में है। सरकार के मुताबिक, आसपास नमाज पढ़ने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह मस्जिद उपलब्ध है। हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी को केंद्र सरकार के जवाब पर अपनी बात रखने के लिए समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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