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‘हेलो बच्चों’ में अलख सर बनेंगे विनीत,बोले- जुनून समझना सबसे कठिन था

वेब सीरीज हेलो बच्चों में विनीत कुमार सिंह अलख पांडे का किरदार निभा रहे हैं। अभिनेता ने बताया कि मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी का निजी अनुभव इस रोल को समझने में काम आया। किरदार की तैयारी में जुनून, संघर्ष और शिक्षक-छात्र दोनों की मानसिकता को पकड़ना सबसे बड़ी चुनौती रहा।
बोले- जुनून समझना सबसे कठिन था
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    एंटरटेनमेंट डेस्क। ‘सांड की आंख’, ‘छावा’ और ‘गोल्ड’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुके विनीत कुमार सिंह अब वेब सीरीज ‘हेलो बच्चों’ में अलख पांडे का किरदार निभा रहे हैं। विनीत का कहना है कि मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी का उनका निजी अनुभव इस भूमिका की नींव समझने में बेहद काम आया। परीक्षा की तैयारी वाली दुनिया, उसका दबाव और संघर्ष वे खुद जी चुके हैं।

    शिक्षक और छात्र- दोनों की समझ रखनी पड़ी

    विनीत मानते हैं कि इस किरदार में उन्हें छात्र और शिक्षक, दोनों की मानसिकता साथ लेकर चलनी थी। खुद मेडिकल की पढ़ाई और दोस्तों का इंजीनियर-डॉक्टर बनने का सफर देखने के साथ-साथ उनके पिता गणितज्ञ रहे हैं। इसलिए पढ़ाई के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी का भाव उनके लिए नया नहीं था।

    मुलाकातों से मिली असली तैयारी में मदद

    किरदार की तैयारी के लिए विनीत ने अलख पांडे से कई बार मुलाकात की, उनके परिवार से मिले और लंबी बातचीत रिकॉर्ड की। उनके अनुसार, सोशल मीडिया वीडियो देखना काफी नहीं था; जरूरी था यह समझा कि शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने की उनकी जिद और ऊर्जा की जड़ क्या है।

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    नकल नहीं, मानसिका पकड़ना चुनौती थी

    विनीत कहते हैं कि उनका मकसद बाहरी हाव-भाव या बोलने की शैली कॉपी करना नहीं था। असली चुनौती थी उस मानसिक शक्ति को पकड़ना, जिसने सीमित प्रयासों से शुरुआत कर एक बड़े एजुकेशन प्लेटफॉर्म की नींव रखी।

    झिझक से आत्मविश्वास तक

    सीरीज में अलख के शुरुआती दिनों को भी दिखाया जाएगा—एक साधारण कमरा, बोर्ड और मोबाइल कैमरे के साथ। विनीत के अनुसार, कैमरों के सामने शुरुआती झिझक और धीरे-धीरे बढ़ते आत्मविश्वास के बदलाव को संतुलित तरीके से दिखाने के लिए उनके लिए सबसे अहम रहा।

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    OTT ने बदला समीकरण

    विनीत मानते हैं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म ने इंडस्ट्री को ज्यादा खुला बनाया है। अब सामग्री सीधे दर्शकों तक पहुंच है और नए कलाकारों को अवसर मिल रहे हैं। हालांकि, वे साफ कहते हैं कि संघर्ष खत्म नहीं होता—बस उसका स्वरूप बदलता है। उनके लिए सीखने और आगे बढ़ने की भूख आज भी उतनी ही मजबूत है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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