वर लक्ष्मी व्रत क्यों होता है खास? जानें इस दिन क्या करें और क्या नहीं
सावन माह के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से धन, सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यह पर्व विशेष रूप से दक्षिण भारत (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना) में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।

AI जनरेटेड सारांश
सावन माह के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी के वरलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से धन, सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यह पर्व विशेष रूप से दक्षिण भारत (तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना) में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।
इस दिन का विशेष संयोग
2025 में वरलक्ष्मी व्रत 8 अगस्त को पड़ेगा, जो सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि और शुक्रवार का दिन है। शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसे में इस दिन व्रत रखना अत्यंत पुण्यकारी और फलदायक होता है।
वरलक्ष्मी व्रत के दिन क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
- देवी वरलक्ष्मी की विधिवत पूजा करें।
- पूजा में हल्दी से लेपित तोरम (या सरदु – नौ गांठों वाला धागा) मां लक्ष्मी को अर्पित करें।
- सुहागिन महिलाएं श्रृंगार सामग्री का दान करें।
- इस दिन फलाहार (फल और दूध आदि) लें और व्रत रखें।
- व्रत कथा और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
इन बातों से करें परहेज
- पूजा के समय फटे-पुराने या गंदे कपड़े न पहनें।
- व्रत के दौरान क्रोध, लोभ और अपवित्रता से दूर रहें।
- तामसिक भोजन (मांस, शराब, लहसुन-प्याज) से परहेज करें।
- किसी को अपशब्द या अपमानजनक बातें न कहें।





















