प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में धर्म और न्याय की लड़ाई एक बार फिर सुर्खियों में है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज कर दी गई है। यह मामला झूंसी थाने में दर्ज किया गया है, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
मामला उस समय सार्वजनिक हुआ, जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य, आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अदालत में गंभीर आरोप लगाते हुए बच्चों के बयान पेश किए। अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया और पुलिस को मामले की स्वतंत्र जांच का निर्देश दिया।
आरोप लगाया गया कि, अविमुक्तेश्वरानंद के गुरुकुल और शिविर में बच्चों को रखा जाता था। जहां उनसे निजी सेवा, कार्यक्रमों में काम और पालकी उठाने जैसे काम कराए जाते थे। इसके अलावा बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न और समलैंगिक कृत्य किए गए।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी 2026 को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद दाखिल किया। उन्होंने अदालत को बताया कि, प्रशासन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था, इसलिए न्याय के लिए सीधे कोर्ट पहुंचे।
24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने झूंसी थाने में शिकायत दर्ज कराई। 25 और 27 जनवरी को पुलिस अधीक्षक और कमिश्नर को ई-मेल और डाक के जरिए शिकायत भेजी गई। कोई कार्रवाई नहीं होने पर अदालत की शरण ली गई।
प्रयागराज की एडीजे पॉक्सो कोर्ट, जज विनोद कुमार चौरसिया ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे गंभीर और संज्ञेय अपराधों में FIR दर्ज करना अनिवार्य है। कोर्ट ने बच्चों के वीडियोग्राफिक बयान रिकॉर्ड किए और मामले की विवेचना के लिए पुलिस को आदेश दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि-
कोर्ट ने कहा कि, केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के अनुसार, FIR में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद का नाम दर्ज किया गया है। इसके अलावा, 2-3 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। FIR मुख्य रूप से पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 समेत अन्य प्रावधानों के तहत दर्ज की गई है। पुलिस अब इस मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कर रही है।
आरोपकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि, हम दर-दर भटक रहे थे। पुलिस हमारे मामले की सुनवाई नहीं कर रही थी। न्यायालय में जाकर हमें न्याय मिला। बच्चों के साथ हुए यौन शोषण और उत्पीड़न की पुष्टि अदालत ने की। अब हम सत्य को सबके सामने रखेंगे। उन्होंने दावा किया कि, शिष्यों ने उन्हें बताया कि उन्हें गुरु सेवा के बहाने उत्पीड़ित किया गया।
अदालत के आदेश के कुछ घंटों बाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान में कहा कि, उन पर लगे आरोप पूरी तरह झूठे हैं और FIR दर्ज होना केवल प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह मामला गोमाता की रक्षा के लिए उनकी आवाज दबाने की साजिश है। स्वामी ने न्यायपालिका में भरोसा जताया और कहा कि जांच के बाद सच पूरी तरह सामने आएगा।
जब प्रशासन ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो बच्चों ने आशुतोष महाराज से संपर्क किया। अदालत में बच्चों ने बताया कि, उन्हें अवैध रूप से गुरुकुल और शिविर में रखा गया और कई बार शारीरिक उत्पीड़न किया गया। आरोप है कि माघ मेला-2025 और माघ मेला-2026 के दौरान भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें यह कहकर दबाव डाला गया कि यह गुरु सेवा का हिस्सा है।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि, हर मामले में FIR दर्ज करना जरूरी नहीं, लेकिन गंभीर और संज्ञेय अपराधों में FIR दर्ज करना आवश्यक है। पॉक्सो अधिनियम लागू होता है, इसलिए जांच के लिए पुलिस रिपोर्ट तैयार करना जरूरी है। FIR दर्ज करना न्यायपालिका का जिम्मा है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिले।
माघ मेले के दौरान दोनों पंथों के प्रमुख साधु आमने-सामने आए। आशुतोष महाराज ने दावा किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बच्चों का उपयोग धार्मिक कार्यक्रम और राजनीतिक दबाव के लिए किया। वहीं, शंकराचार्य ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि यह मामला फर्जी और राजनीतिक प्रेरित है। विवाद के कारण अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को रोक दिया गया और उनके कुछ शिष्य हिरासत में लिए गए।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था। उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से शिक्षा प्राप्त की और 2006 में स्वामी स्वरूपानंद से सन्यास लिया। इसके बाद उन्हें ज्योतिष्पीठ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया।
वहीं आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कांधला, शामली में हुआ। वे शाकुंभरी सिद्धपीठ से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं।
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तारीख |
घटना |
विवरण |
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24 जनवरी 2026 |
झूंसी थाना शिकायत |
बच्चों के शोषण की प्रारंभिक रिपोर्ट |
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25 जनवरी 2026 |
पुलिस कमिश्नर को ई-मेल |
एफआईआर दर्ज करने की मांग |
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27 जनवरी 2026 |
पुलिस अधीक्षक को शिकायत |
कोई कार्रवाई नहीं, कोर्ट का सहारा लिया |
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8 फरवरी 2026 |
पॉक्सो कोर्ट में वाद |
बच्चों के बयान अदालत में दर्ज |
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13 फरवरी 2026 |
सुनवाई |
जज ने बच्चों के बयान रिकॉर्ड किए |
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21 फरवरी 2026 |
आदेश |
FIR दर्ज करने का निर्देश, पुलिस जांच शुरू |
यह मामला नाबालिगों के यौन शोषण से संबंधित है। जांच के दौरान बच्चों की पहचान और सम्मान की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। FIR दर्ज होने और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक सत्य सामने आएगा।
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