सड़कों और निर्माण कार्यों में किया जाएगा प्रदेश के 413 नगरों में एकत्र होने वाले कचरे का उपयोग

अशोक गौतम
भोपाल। शहरों में प्रतिदिन निकल रहे डंप कचरे का उपयोग सड़कों और निर्माण कार्य के उपयोग में होगा। इस संबंध में नीति बनाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को नीति बनाने के लिए कहा है। नीति बनाने से पहले विभिन्न विभागों, जन प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों की राय ली जाएगी। इस आधार पर सरकार इसके लिए रोडमैप तैयार करेगी। इससे रोजाना निकलने वाले कचरे को शहर में डंप करने से रोका जा सकेगा। प्रदेश में 6,737 टन कचरा रोज निकलता है। इसमें सिर्फ 20 फीसदी कचरे का ही औद्योगिक उपयोग हो पाता है। शेष कचरे को निकायों के बाहर डंप किया जा है। शहरों में प्रदूषण का प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में सभी राज्यों की एक वर्कशॉप की थी। इसके जरिए इस कचरे को निपटाने पर सुझाव लिए गए थे।
शहरों से रोज निकलने वाला कचरा
-रोजाना निकलने वाला कचरा 6757.01 टन
-रोजाना का बायो वेस्ट 3705.36 टन
-प्रतिदिन सूखा कचरा 3694.80 टन
-प्रतिदिन मलबा 336.85 टन
एसओआर में होगा शामिल
मकान, सड़क के मलबे का उपयोग सड़कों के निर्माण में होगा। इसके लिए निर्माण एजेंसियों को यह तय करना पड़ेगा कि उन्हें कुछ प्रतिशत इसका उपयोग करना अनिवार्य होगा। नगरीय निकाय, लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई को अपने एसओआर (शेड्यूल आॅफ रेट) में शामिल करना होगा।
एनएचएआई और एमपीआरडीसी सड़कों के किनारे गड्ढे भरने में ठोस अपशिष्ट उपयोग करेगा।
टाइल्स और पेवर ब्लॉक को दिया जा रहा बढ़ावा
मलबे, मिट्टी का उपयोग पेवर ब्लॉक तैयार करने में किया जाएगा। इससे जुड़े उद्योगों को राज्य सरकार बढ़ावा और अनुदान देगी। निकायों को यह अनिवार्य किया जाएगा कि वे शहरों में इसे मटेरियल से बनें पेवर ब्लाकों का
उपयोग करें। टाइल्स भी लगाए जाएंगे।
सड़क निर्माण में होगा प्लास्टिक का उपयोग
वर्तमान जबलपुर, कटनी, रीवा सहित कुछ नगर निगम पन्नी और प्लास्टिक का उपयोग सीमेंट और पॉवर संयंत्रों को दे रहे हैं। शेष निकायों में प्लास्टिक और पन्नियां डंप हो रही हैं। इससे शहर के किनारे इनका एक पहाड़ बनता जा रहा है। इनका उपयोग भी अनिवार्य रूप से डामर के साथ सड़कें बनाने में होगा। इसके अलाव डामर शीट तैयार करने में किया जाएगा। वहीं गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी। इसके लिए गौशालाएं, नगर निगम और कृषि विभाग एक ठोस नीति बनाएगी। कचरे को किसानों के खेतों तक पहुंचाने कर उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे मिलने वाली राशि संयंत्रों को उपलब्ध कराई जाएगी।
शहर के कचरे का पूरा उपयोग करेंगे
शहर से रोजाना निकलने वाले तमाम तरह के कचरे के उपयोग के संबंध में नीति बनाई जाएगी। इसके लिए तमाम एजेंसियों को बुलाकर उनसे इसके उपयोग के संबंध में राय ली जाएगी। जिससे शहर के कचरे का पूरा उपयोग हो सकें और निकायों के लिए कमाई का जरिया भी बन सके।
संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग












