अमेरिका में एक बार फिर पैदा हुआ शटडाउन का खतरा, अस्थायी फंडिंग विधेयक सीनेट में खारिज

वाशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर शटडाउन यानी सरकारी कामकाज बाधित होने का खतरा गहराता दिख रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगर तय समय सीमा में जरूरी वित्तीय प्रावधान पारित नहीं हुए तो संघीय सरकारी विभागों और एजेंसियों के लिए धन की आपूर्ति रुक जाएगी और लाखों कर्मचारी वेतन से वंचित रह जाएंगे। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सीनेट ने एक अस्थायी फंडिंग बिल खारिज कर दिया है, जो 30 सितंबर के बाद भी सरकारी एजेंसियों को चलाने के लिए खर्च उपलब्ध कराता। इस बिल को 21 नवंबर तक मौजूदा स्तर पर सरकारी खर्च जारी रखने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वोटिंग में इसे बहुमत नहीं मिल पाया और 44 के मुकाबले 48 वोट से यह प्रस्ताव गिर गया।
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डेमोक्रेट सांसद इस विधेयक के हैं खिलाफ
डेमोक्रेट सांसद इस बिल के खिलाफ थे क्योंकि वे इसमें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त प्रावधान चाहते थे। विशेष रूप से “अफोर्डेबल केयर एक्ट” के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी और निम्न आय वर्ग के लिए मेडिकेड फंडिंग की बहाली उनकी मुख्य मांग रही। रिपब्लिकन इस पर सहमत नहीं हुए। उनका आरोप है कि डेमोक्रेट अपनी राजनीतिक मांगों के कारण सरकार को ठप करने का खतरा बढ़ा रहे हैं। सीनेट में बहुमत नेता जॉन थ्यून ने साफ कहा आखिरकार यह मामला इस पर आ टिकेगा कि डेमोक्रेट यह तय करें कि वे सरकार को खुला रखना चाहते हैं या बंद करना चाहते हैं।
फिलहाल सांसद एक हफ्ते के अवकाश पर गए
रिपब्लिकन दल ने कहा गया कि 29 सितंबर को, यानी समय सीमा से एक दिन पहले, सीनेट दोबारा मतदान कर सकती है। लेकिन यह तय नहीं है कि उस दिन सहमति बन पाएगी या नहीं। फिलहाल सांसद अपने-अपने राज्यों में सप्ताह भर के अवकाश पर चले गए हैं, जिससे अनिश्चितता और गहरी हो गई है। इस बीच, यदि समझौता नहीं हुआ तो 30 सितंबर के बाद सरकारी बजट का प्रवाह रुक जाएगा और संघीय एजेंसियां प्रभावित होने से नहीं बचेंगे। इसका असर रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आप्रवासन से लेकर सरकारी दफ्तरों तक हर जगह महसूस किया जाएगा।
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बिल में $88 मिलियन का विशेष प्रावधान शामिल
इस अस्थायी बिल में करीब 88 मिलियन डॉलर का एक विशेष प्रावधान भी शामिल था, जो सांसदों, कार्यपालिका के अधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा पर खर्च होना था। यह प्रावधान हाल ही में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या के बाद किया गया था। लेकिन इसने में ज्यादा योगदान नहीं किया। मतदान में केवल 43 रिपब्लिकन और एक डेमोक्रेट, जॉन फेटरमैन ने समर्थन किया। दो रिपब्लिकन लिसा मर्कॉव्स्की और रैंड पॉल डेमोक्रेट और निर्दलीयों के साथ मिलकर विरोध में खड़े हो गए। इसके अलावा आठ रिपब्लिकन सांसद अनुपस्थित रहे, जिससे समर्थन और घट गया।
हाल के सालों में कई बार पैदा हो चुकी यह स्थिति
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी बजट प्रक्रिया बेहद जटिल है। हर साल लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर का संघीय बजट बनता है, जिसमें से लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अनिवार्य खर्च होता है, जैसे सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर और राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज। विवाद आमतौर पर उस हिस्से पर होता है जो वार्षिक विनियोग से जुड़ा होता है और यह हिस्सा कुल बजट का लगभग एक-चौथाई होता है। इस हिस्से पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दल बार-बार टकराते हैं और यही कारण है कि हाल के सालों में कई बार अमेरिकी सरकार शटडाउन की कगार पर पहुंच चुकी है।
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आम लोगों के जीवन पर पड़ता है गहरा असर
सरकार का शटडाउन केवल राजनीतिक खींचतान नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। सरकारी कर्मचारी वेतन नहीं पाते, वीजा और पासपोर्ट जैसी सेवाएं ठप हो जाती हैं, राष्ट्रीय उद्यान और दफ्तर बंद हो जाते हैं, और पूरी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा होती है। मौजूदा परिस्थिति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 29 सितंबर को क्या दोनों दल समझौते पर पहुंचते हैं या फिर अमेरिका एक बार फिर शटडाउन का सामना करता है।












