अमेरिका ने भारत की कंपनियों पर लगाया बैन, करोड़ों डॉलर के कारोबार पर गिरी गाज, तेल-पेट्रोकेमिकल डील बनी वजह

ईरान के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा आर्थिक रुख अपनाया है। अमेरिकी कार्रवाई में भारत से जुड़ी कुछ कंपनियों और भारतीय नागरिकों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद-बिक्री में कारोबार किया। अमेरिका की ओर से की गई ऐसी कार्रवाई का मकसद ईरान की कमाई के बड़े स्रोतों पर दबाव बनाना है। ईरान के लिए तेल का कारोबार बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से उसे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा हासिल होती है। अमेरिका लंबे समय से ईरान के तेल कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाता रहा है।
करीब 119 मिलियन डॉलर के कारोबार का मामला
बताई गई जानकारी के मुताबिक, भारत से जुड़ी तीन कंपनियों पर ईरान से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के आरोप हैं। इन कंपनियों के जरिए करीब 119 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के कारोबार का मामला बताया जा रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है। इस मामले में तीन भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। अमेरिका का कहना है कि ईरान से जुड़े तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार पर कार्रवाई करके उसकी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग पहले भी ईरान की तेल बिक्री, शिपिंग नेटवर्क और वित्तीय चैनलों से जुड़े कई विदेशी लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा चुका है।
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किन भारतीय कंपनियों के नाम सामने आए?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतिबंधों की कार्रवाई में भारत स्थित सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड, PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम बताए गए हैं। बताया गया है कि सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर के पेट्रोलियम उत्पाद ईरान से खरीदे थे। वहीं, PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 25-25 मिलियन डॉलर के पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद का आरोप बताया गया है। इस तरह तीनों कंपनियों से जुड़े लेन-देन की कुल रकम करीब 119 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।
हालांकि, किसी कंपनी पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने का मतलब यह नहीं होता कि अमेरिकी आरोप अपने आप किसी भारतीय कानूनी प्रक्रिया में दोष सिद्ध हो गए हैं। प्रतिबंध अमेरिकी कानून और अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था के तहत लगाए जाते हैं।
‘Economic Fury’ के जरिए बढ़ाया जा रहा दबाव
अमेरिकी ट्रेजरी की हालिया आधिकारिक घोषणाओं में ईरान पर चल रहे व्यापक अभियान का नाम ‘Economic Fury’ दिया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 2026 में इसी अभियान के तहत ईरान के तेल, वित्तीय नेटवर्क और विदेशी खरीद नेटवर्क पर कई कार्रवाइयां की हैं। इस के तहत अमेरिका ईरान से जुड़े उन नेटवर्क को निशाना बना रहा है, जिनके जरिए तेल की कमाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाया जाता है या विदेशी मुद्रा में बदला जाता है।
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तेल के बाद वित्तीय नेटवर्क भी निशाने पर
अमेरिका की रणनीति सिर्फ तेल खरीदने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है। अमेरिका के अनुसार, ईरान से जुड़े कुछ नेटवर्क विदेशी कंपनियों, शेल कंपनियों और बिचौलियों के जरिए लेन-देन करते हैं। इन नेटवर्क को तोड़ना अमेरिकी आर्थिक दबाव की रणनीति का बड़ा हिस्सा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़ी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगना आर्थिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण संबंधित कंपनियों के लिए अमेरिकी वित्तीय प्रणाली या अमेरिकी कारोबार से जुड़े रास्तों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।




















