Iran US War:जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान पर फिर बरसा अमेरिका, पश्चिम एशिया में बढ़ा युद्ध का खतरा

वॉशिंगटन। जॉर्डन में हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों पर हुए हमले का जवाब है। दूसरी ओर ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। लगातार बढ़ रहे इस टकराव से पश्चिम एशिया में हालात और गंभीर हो गए हैं तथा पूरी दुनिया की नजर अब इस संघर्ष पर टिकी हुई है।
जॉर्डन हमले के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक सैनिक अब भी लापता बताया जा रहा है। इस घटना के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।
ईरान के कई सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान के दौरान निगरानी केंद्रों, सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, भूमिगत हथियार भंडार और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हवाई कार्रवाई की। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
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घायल सैनिकों की हालत में सुधार
हमले में घायल हुए चार अमेरिकी सैनिकों का इलाज जॉर्डन के अस्पतालों में किया गया। सेना के अनुसार सभी सैनिक अब अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं। वहीं मामूली रूप से घायल अन्य जवान इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट आए हैं। इस संघर्ष के दौरान अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं।
ईरान की चेतावनी और जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि यदि अमेरिका अपने हमले जारी रखता है तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। इसके बाद ईरान ने कुवैत, इराक, बहरीन, जॉर्डन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कुवैत में एक जल शोधन संयंत्र और तेल सुविधा को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है, जिससे क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर दिखाई दे रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में लगातार सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दबाव बढ़ सकता है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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समाधान की राह हुई मुश्किल
दोनों देशों की ओर से लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई के कारण बातचीत की संभावनाएं कमजोर होती नजर आ रही हैं। ईरान ने अमेरिका पर पहले हुए समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जबकि अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बता रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।











