पहला राष्ट्रपति दौरा!राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक यूरोप दौरा, तीन देशों में बढ़ेंगी भारत की नई साझेदारियां

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को तीन यूरोपीय देशों की यात्रा की शुरुआत की। इस दौरे के दौरान मोल्दोवा, उत्तर मैसेडोनिया और रोमानिया जाएंगी। इन देशों के नेताओं के साथ उनकी कई महत्वपूर्ण बैठकें होंगी, जिनमें व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि पहली बार कोई भारतीय राष्ट्रपति मोल्दोवा और उत्तर मैसेडोनिया का दौरा कर रहा है। सरकार का मानना है कि इससे भारत और यूरोप के बीच रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।
मोल्दोवा से शुरू होगा दौरा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की विदेश यात्रा की शुरुआत मोल्दोवा से होगी। किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह इस देश का पहला दौरा है। यहां वह राष्ट्रपति मैया सैंडू के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके अलावा संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से भी मुलाकात होगी। इस दौरान दोनों देश व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर चर्चा करेंगे। भारतीय समुदाय और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से भी राष्ट्रपति की मुलाकात तय है।
उत्तर मैसेडोनिया में कई अहम बैठकें
मोल्दोवा के बाद राष्ट्रपति मुर्मू उत्तर मैसेडोनिया पहुंचेंगी। यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। यहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा, प्रधानमंत्री और संसद अध्यक्ष से होगी। राष्ट्रपति उत्तर मैसेडोनिया की संसद को भी संबोधित करेंगी। इसके साथ ही भारत-उत्तर मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
रोमानिया में व्यापार पर रहेगा फोकस
यात्रा का अंतिम चरण रोमानिया में होगा। करीब तीन दशक बाद कोई भारतीय राष्ट्रपति इस देश के दौरे पर जा रहा है। यहां राष्ट्रपति मुर्मू भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगी और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगी। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।
भारत-यूरोप रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती
विदेश मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा केवल तीन देशों तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ भारत के बढ़ते संबंधों का संकेत है। भारत कृषि, विज्ञान, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल क्षेत्र में इन देशों के साथ लंबे समय तक सहयोग बढ़ाना चाहता है। साथ ही यूरोपीय संघ के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है।











