92 करोड़ का इनाम और ईरानी नेताओं की तलाश…ट्रंप के टारगेट पर मोजतबा खामेनेई समेत कौन-कौन?

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को और गर्म कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में जानकारी देने वालों के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी लगभग 92 करोड़ रुपए से अधिक का इनाम घोषित किया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं और क्षेत्र में युद्ध का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस कार्यक्रम के तहत घोषणा
यह घोषणा अमेरिका के प्रसिद्ध कार्यक्रम रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस (Rewards for Justice) के तहत की गई है, जिसे अमेरिकी विदेश विभाग की राजनयिक सुरक्षा सेवा संचालित करती है। अमेरिका का कहना है कि, जिन लोगों पर इनाम घोषित किया गया है, वे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े अहम पदों पर रहे हैं और दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
10 मिलियन डॉलर का इनाम, किस पर और क्यों?
अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि, यह इनाम उन लोगों को दिया जाएगा जो मुजतबा खामेनेई या IRGC से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में विश्वसनीय जानकारी देंगे। अमेरिका का आरोप है कि, ये अधिकारी ईरान की सैन्य और खुफिया रणनीतियों को संचालित करते हैं और वैश्विक स्तर पर कई ऑपरेशनों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल रहे हैं। इस सूची में कई प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं-
- मुजतबा खामेनेई - ईरान के नए सुप्रीम लीडर
- अली असगर हेजाजी - सर्वोच्च नेता के कार्यालय के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ
- अली लारीजानी - शीर्ष सुरक्षा अधिकारी
- याह्या रहीम सफवी - वरिष्ठ सैन्य सलाहकार
- स्कंदर मोमेनी - ईरान के गृह मंत्री
- इस्माइल खतीब - खुफिया मंत्री
अमेरिका का कहना है कि, इन नेताओं से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी देने वाले व्यक्ति को अधिकतम 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जा सकता है।
क्या है रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस कार्यक्रम?
यह कार्यक्रम अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा संचालित एक अंतरराष्ट्रीय अभियान है। इसका उद्देश्य आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जानकारी जुटाना है। इस कार्यक्रम के तहत दुनिया भर में उन लोगों को इनाम दिया जाता है जो आतंकवादी संगठनों, उनके नेताओं या वैश्विक सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले नेटवर्क के बारे में जानकारी देते हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि, जानकारी देने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और टोर नेटवर्क जैसे सुरक्षित चैनलों का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा अगर जानकारी देने वाले व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा होता है, तो अमेरिका उसे किसी अन्य देश में सुरक्षित तरीके से बसाने की व्यवस्था भी कर सकता है।
कौन हैं मुजतबा खामेनेई?
मुजतबा खामेनेई ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे हैं। हाल ही में हुए युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान की शक्तिशाली संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मुजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया।
सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आए हैं। यही वजह है कि उनकी स्थिति और गतिविधियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
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क्या हमले में घायल हुए मुजतबा?
हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हो गई है कि, अमेरिका और इजरायल के हमलों में मुजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि, उन्हें लगता है कि मुजतबा खामेनेई जिंदा हैं लेकिन घायल हैं। हालांकि, ईरान की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ईरान के सरकारी मीडिया में पहले यह कहा गया था कि उन्हें केवल हल्की चोटें आई हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि, हमलों में मुजतबा के परिवार के कई सदस्य मारे गए, जिनमें उनकी पत्नी, मां और अन्य रिश्तेदार शामिल बताए गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान पर बढ़ते हमले
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों, तेल डिपो और रणनीतिक केंद्रों को निशाना बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और आर्थिक संसाधनों को कमजोर करना है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने अब ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भी निशाने पर लिया है।
अमेरिका ने भेजे 2500 मरीन सैनिक
युद्ध के बढ़ते खतरे के बीच अमेरिका ने लगभग 2500 मरीन सैनिकों को पश्चिम एशिया की ओर रवाना कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और युद्धपोत USS Tripoli को क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया गया है।
इस कदम से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका को जरूरत पड़ने पर तेज और बड़े सैन्य ऑपरेशन करने में मदद मिलेगी।
ट्रंप का दावा- ईरान जल्द करेगा सरेंडर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि ईरान जल्द ही सरेंडर कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य कार्रवाई का असर साफ दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में ईरानी ठिकानों पर और बड़े हमले किए जा सकते हैं। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इतनी जल्दी झुकने वाला नहीं है और यह संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है।
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मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
मध्य पूर्व पहले से ही दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। यहां ऊर्जा संसाधन, धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष लंबे समय से मौजूद रहे हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर बढ़ते हमलों और अब शीर्ष नेताओं पर इनाम घोषित किए जाने से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है।











