NSE IPO से पहले झटका!अनलिस्टेड शेयर ₹2,075 से फिसलकर ₹1,885 पर, SEBI नियमों ने बदला खेल

NSE के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर बाजार में हलचल है लेकिन इसी बीच इसके अनलिस्टेड शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। हाल ही में ₹2,075 के स्तर तक पहुंचे शेयर अब फिसलकर ₹1,885 के आसपास आ गए हैं।
Follow on Google News
अनलिस्टेड शेयर ₹2,075 से फिसलकर ₹1,885 पर, SEBI नियमों ने बदला खेल

NSE के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर बाजार में हलचल है लेकिन इसी बीच इसके अनलिस्टेड शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। हाल ही में ₹2,075 के स्तर तक पहुंचे शेयर अब फिसलकर ₹1,885 के आसपास आ गए हैं। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण SEBI का नया नियम माना जा रहा है जिसने निवेशकों के लिए IPO में भागीदारी के समीकरण बदल दिए हैं।

OFS मॉडल: NSE खुद नहीं जुटाएगी पैसा

NSE अपने IPO के जरिए ₹20,000 करोड़ से ज्यादा जुटाने की तैयारी में है। हालांकि यह पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) होगा यानी कंपनी खुद कोई नया पैसा नहीं उठाएगी। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे और करीब 4-4.5% इक्विटी बाजार में उतारी जाएगी। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जून तक दाखिल किया जा सकता है।

SEBI के नियम में एक साल होल्डिंग जरूरी

SEBI के नियम के अनुसार OFS में वही निवेशक शेयर बेच सकते हैं जिन्होंने ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने से कम से कम एक साल पहले से शेयर होल्ड किए हों। इसका सीधा मतलब है कि जून 2025 के बाद अनलिस्टेड मार्केट से शेयर खरीदने वाले निवेशक IPO में हिस्सा नहीं बेच पाएंगे। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारकों को 27 अप्रैल तक OFS में भाग लेने के लिए अपनी सहमति देनी होगी।

ये भी पढ़ें: Meta Layoffs 2026: 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी, AI पर फोकस बढ़ाते हुए बड़ा फैसला

गिरावट की 3 बड़ी वजहें

1. लास्ट-मिनट निवेशकों की एंट्री बंद

पहले कई निवेशक IPO से ठीक पहले अनलिस्टेड शेयर खरीदकर लिस्टिंग गेन कमाते थे। नए नियम के बाद यह रास्ता बंद हो गया है जिससे डिमांड घट गई।

2. वैल्युएशन पर सवाल

अनलिस्टेड मार्केट में NSE की कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी थीं। अब जैसे-जैसे IPO की डिटेल साफ हो रही है निवेशक वैल्युएशन को लेकर सतर्क हो गए हैं।

3. बदला निवेशकों का नजरिया

अब निवेशक सिर्फ ‘हाइप’ के आधार पर पैसा नहीं लगा रहे बल्कि लिस्टिंग के बाद के प्रदर्शन और फंडामेंटल्स को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

तेजी से बढ़ा शेयरहोल्डर बेस

NSE के निवेशकों की संख्या में भी जबरदस्त उछाल आया है। 2025 की शुरुआत में जहां करीब 39,000 निवेशक थे वहीं साल के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 1.8 लाख से ज्यादा हो गया। इतने बड़े और बिखरे हुए शेयरहोल्डर बेस के कारण OFS की प्रक्रिया और जटिल हो गई है। इसे मैनेज करने के लिए NSE ने बैंकर्स और कानूनी सलाहकारों की बड़ी टीम तैनात की है।

ये भी पढ़ें: भारत-रूस रक्षा समझौता लागू : दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर 3000 हजार सैनिक तैनात करेंगे, दुनिया में बढ़ी हलचल

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP दाखिल किया था लेकिन रेगुलेटरी और लीगल मुद्दों जैसे को-लोकेशन और डार्क फाइबर केस की वजह से इसे वापस लेना पड़ा। अब लंबे इंतजार के बाद IPO की प्रक्रिया फिर से रफ्तार पकड़ती दिख रही है।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts