एक बार फिर लापरवाही का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मानपुर रोड स्थित मगधी गेट के पास शनिवार सुबह एक डीएम बाघ को सड़क पार करते हुए देखा गया। हैरानी की बात यह रही कि जहां एक ओर बाघ जंगल की ओर जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर वीडियो बनाने में जुटे रहे।
वायरल हो रहे वीडियो में साफ नजर आता है कि कई लोग अपने वाहन रोककर खड़े हैं, तो कुछ लोग वाहन से उतरकर सड़क पर ही बाघ के बेहद करीब पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थिति किसी भी वक्त गंभीर हादसे में बदल सकती थी। सौभाग्य से बाघ बिना किसी घटना के जंगल की ओर चला गया, लेकिन सवाल यह है कि अगर कुछ अनहोनी हो जाती तो जिम्मेदार कौन होता।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। इस मार्ग पर कई बार बाघों की आवाजाही देखी जा चुकी है। इसके बावजूद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का प्रबंधन पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है। न तो यहां पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम किए गए हैं।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस इलाके में वन्यजीवों की सक्रियता लगातार बनी हुई है, वहां न तो ट्रैफिक कंट्रोल है और न ही लोगों को जागरूक करने का कोई प्रयास दिखता है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ अक्सर ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना किसी रोक-टोक के पहुंच जाती है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
यह घटना सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है। सवाल उठता है कि क्या अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? क्या किसी इंसानी जान या वन्यजीव के नुकसान के बाद ही कार्रवाई होगी?
जरूरत इस बात की है कि तत्काल प्रभाव से इस क्षेत्र में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए, वाहनों की गति सीमित की जाए और लोगों को ऐसे खतरनाक व्यवहार से रोका जाए। वरना अगली बार यह वीडियो नहीं, बल्कि हादसा बन सकता है।