उज्जैन। भारत में शनि देव के कई प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है। अक्सर शनि देव के मंदिर में उनको काले रंग की प्रतिमा में देखा गया है। लेकिन शनि देव के इस अनोखे मंदिर में भक्त काले नहीं बल्कि भगवा रंग में उनके दर्शन करते हैं। जहां उनकी पूजा पिंडी स्वरुप में की जाती है। शनिदेव के इस रूप को भगवान शिव का ही अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि यह विश्व का पहला मंदिर है, जहां शनिदेव बाबा के रूप में विराजमान हैं।
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यह मंदिर उज्जैन के क्षिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट किनारे स्थित है। उज्जैन के नवग्रह शनि देव मंदिर का अनोखा पिंड़ी और भगवा रंग वाला अदांज भक्तो का ध्यान अपनी और खींच लेता हैं। अक्सर शनि देव की प्रतिमा काले रंग की होती है, लेकिन यहां दृश्य कुछ अलग है। इस नवग्रह शनि देव मंदिर का इतिहास 2000 साल पुराना है।
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शनि देव कर्म धर्म और न्याय के देवता माने जाते हैं। वों लोगों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते है। वहीं उज्जैन के क्षिप्रा नदीं के तट पर स्थित है शनि देव का एक ऐसा अनोखा भगवा रंग वाला मंदिर जहां प्रतिमा की जगह पिंड़ी के रुप में करते हैं शनि देव की पूजा। इस मंदिर में देश भर के श्रद्धालु अपनी साढ़ेसाती और ढ़य्या का प्रभाव दूर करने आते हैं।
भगवा रंग वाले इस मंदिर को महान स्म्राट न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा विक्रमादित्य ने इस मंदिर को अपनी शनि देव की महादशा से मुक्ति पाने का बाद बनवाया था। भक्तो के लिए यह बहुत खास हैं। इसकी विषेष बात यह है कि इस मंदिर में शनिदेव के साथ नौ ग्रह भी विराजमान है। बता दें, पिंडी वाले भगवा रंग के शनि देव की शनिचरी अमावस्या पर विषेश पूजा की जाती है।