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उज्जैन के आबकारी अधिकारी हर्षवर्धन राय के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे सवाल, चीफ सेक्रेटरी को शिकायत

उज्जैन के आबकारी उपायुक्त हर्षवर्धन राय के जाति प्रमाण पत्र को लेकर मुख्य सचिव से शिकायत की गई है। रायसेन निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नीलेंद्र मिश्र ने प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए हैं। आरटीआई में दमोह के संबंधित दायरा पंजी में प्रमाण पत्र का क्रमांक दर्ज नहीं होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने 2014 में प्रमाण पत्र को वैध माना था।
उज्जैन के आबकारी अधिकारी हर्षवर्धन राय के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे सवाल, चीफ सेक्रेटरी को शिकायत
फाइल फोटो

भोपाल। मध्यप्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी में आने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। विधानसभा में विधायक जानकारी मांगते हैं तो आरटीआई के जरिए जानकारी जुटाई जा रही हैं। इसी क्रम में उज्जैन के आबकारी उपायुक्त हर्षवर्धन राय के जाति प्रमाण पत्र को लेकर मुख्य सचिव को शिकायत भेजी गई है। आरटीआई एक्टीविस्ट नीलेंद्र मिश्र निवासी रायसेन ने शिकायत में आरोप लगाया है कि हर्षवर्धन राय वर्तमान में उपायुक्त आबकारी के पद पर उज्जैन में पदस्थ हैं, उनके द्वारा दमोह से अनुसूचित जाति (चिराड) के रूप में जाति प्रमाण बनवाया और वर्ष 1997 की मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में जिला आबकारी अधिकारी के पद को प्राप्त किया। उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी है और वे 28 साल से सरकारी नौकरी कर रहे हैं।

वर्ष 1998 में बना जाति प्रमाण पत्र 

रिकॉर्ड के अनुसार हर्ष वर्धन राय का मूल निवासी का प्रमाण पत्र 6 जनवरी 1998 में कार्यालय तहसीलदार दमोह में बना है। प्रमाण पत्र में प्रकरण क्रमांक-592बी/121-97-98 दर्ज है और अनुविभागीय अधिकारी दमोह, नायब तहसीलदार और प्रधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर हैं।

आरटीआई में दी गई यह जानकारी

अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय दमोह ने 6 अक्टूबर 2026 को आरटीआई में लिखित जानकारी दी है कि कार्यालयीन दायरा वर्ष 1997-98 में मद-ब-121 के कुल 446 प्रकरण दर्ज होना पाया गया है। 592 नंबर का जाति प्रमाण पत्र संबंधित दायरा पंजी में दर्ज नहीं है।

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छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र वैध माना 

इधर,राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति ने 23 जून 2014 को दिए अपने निर्णय में कहा है कि हर्ष वर्धन राय को सक्षम प्राधिकारी दमोह के द्वारा अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र विधिवत रूप से जारी हुआ है, क्योंकि इनके पिता अशोक कुमार राय की जाति चिडार अनुसूचित जाति उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश 17 मार्च 1986 के द्वारा मान्य की गई है।

ये सवाल हो रहे खड़े

  • तहसीलदार कार्यालय से बना प्रमाण पत्र छह माह तक के लिए ही वैध।
  • जाति प्रमाण पत्र को अबतक डिजिटल क्यों नहीं कराया।
  • एसडीएम कार्यालय में 592 नंबर प्रमाण पत्र ही नहीं बने।
  • एसडीएम के हस्ताक्षर से स्थाई जाति प्रमाण पत्र क्यों नहीं बना?

मेरा जाति प्रमाण पत्र 1998 से दर्ज 

आबकारी उपायुक्त हर्षवर्धन राय ने बताया कि मेरा जाति प्रमाण पत्र 1997-98 में कार्यालय तहसीलदार दमोह की दायरा पंजी में दर्ज है। 2005 में एसडीएम कार्यालय से उसी दायरा नंबर पर प्रमाण पत्र जारी हुआ। 2014 में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने भी मेरा जाति प्रमाण पत्र वैध माना है।

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पूरी जानकारी  के लिए कार्यालय में देखना पड़ेगा

इस बारे में दमोह के एसडीएम संजय दुबे ने कहा कि आपके द्वारा चाही गई जानकारी के लिए ऑफिस में देखना पड़ेगा। जहां तक जाति प्रमाण पत्र बनाने की बात है तो वर्ष 1998 के बाद प्रमाण पत्र बनाने के अधिकार एसडीएम को हो गए थे।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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