शहडोल: जब हाथियों ने कब्र पर खड़े होकर बयां किया दर्द, इंसानियत को दिया संवेदना का सबक, करंट की चपेट में आने से हुई थी हाथी की मौत

शहडोल। कभी सोचा है कि जिसे हम "बेजुबान" कहकर अनदेखा कर देते हैं, वह भी खामोशी में कितना कुछ कह जाता है? शहडोल के ग्राम चंदौली में 13 अक्टूबर को करंट लगने से बाणसागर क्षेत्र में 15 वर्षीय नर हाथी मखना की मौत हो गई। वन विभाग ने उसे विधिवत दफना दिया। लेकिन उसके बाद मृत हाथी का पूरा झुंड उसकी कब्र पर पहुंचा और वहां देर तक ठहरा रहा। न कोई चिंघाड़, न कोई हलचल, बस एक गहरी खामोशी, जो शब्दों से कहीं ज्यादा बोल रही थी। मानो साथी को अंतिम विदाई देने आए हों। यह दृश्य देखकर आंखें भर आएं, तो कोई हैरानी नहीं।
हाथियों में होता है भावनात्मक जुड़ाव: डीएफओ
DFO तरुणा वर्मा कहती हैं कि हाथी स्वभाव से सामाजिक होते हैं और उनके बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव होता है। उनमें पूर्वजों की स्मृति भी होती है, इसलिए मृत साथी के प्रति उनका विशेष व्यवहार देखने को मिलता है-ठीक वैसे ही जैसे इंसान शोक सभा में एकजुट होते हैं। यह दृश्य वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सिद्ध न भी हो, पर दिल से देखें तो यह प्रेम, स्मृति और विरह की सबसे सच्ची तस्वीर है।
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खामोशी में होती है दिल की सबसे गहरी बात
यह घटना बताती है कि जंगल सिर्फ जीवन-संघर्ष का मैदान नहीं, बल्कि रिश्तों और संवेदनाओं की अनमोल धरोहर भी है। हाथियों ने जिस तरह अपने साथी के लिए शोक जताया, वह इंसानियत को एक सबक है-कि भावनाएं सिर्फ मनुष्यों की नहीं होतीं, और जिसे हम बेजुबान कहते हैं, वह भी खामोशी में दिल की सबसे गहरी बात कह जाता है।
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