पंजाब में पराली जलाने के 2,347 मामले आए सामने, बढ़ा विवाद, 647 FIR दर्ज

देश में धान की कटाई का मौसम चल रहा है और इसके साथ ही पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। पंजाब में खेतों में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसका असर अब दिल्ली की हवा पर भी दिखाई देने लगा है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन मामलों में प्रशासन ने 40.37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसमें से अब तक 23.05 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं। वहीं, इस मामले को लेकर दिल्ली और पंजाब सरकार के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
पंजाब में पराली जलाने के 2,347 मामले, 647 FIR दर्ज
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पराली जलाने की घटनाओं की जांच के लिए 1,942 खेतों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 868 जगहों पर खेतों में आग जलने की पुष्टि हुई। इसके अलावा 801 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। पराली जलाने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई भी की है। अब तक कुल 647 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। वहीं, 723 मामलों में जमीन से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों ने 689 चेतावनी नोटिस जारी किए हैं। इन कार्रवाइयों का मकसद किसानों को पराली जलाने से रोकना और खेतों में आग लगाने की घटनाओं को कम करना है।
तरनतारन में सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले
पंजाब के अलग-अलग जिलों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तरनतारन जिले में सबसे ज्यादा 558 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 मामले सामने आए हैं। वहीं, पटियाला जिले में अब तक पराली जलाने की 110 घटनाएं दर्ज की गई हैं। यहां 67 जगहों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 24 जगहों पर आग जलने की पुष्टि हुई। इन मामलों में 15 जगहों पर पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। विभाग ने कुल 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसमें से 35 हजार रुपये की वसूली हो चुकी है। पटियाला में पराली जलाने के मामले में 21 FIR दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 10 मामलों में जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और 25 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
85 फीसदी से ज्यादा धान की कटाई पूरी, फिर भी जल रही पराली
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में धान की खेती का कुल क्षेत्रफल 32.87 लाख हेक्टेयर है। इसमें से 85.10 प्रतिशत हिस्से में धान की कटाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन की ओर से खेतों की जांच, जुर्माना, FIR और नोटिस जैसी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद भी पराली जलाने पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी यह समस्या प्रशासन के लिए चुनौती बनी रह सकती है।
दिल्ली का AQI चार दिन में 60 से बढ़कर 377 पहुंचा
लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर सिर्फ चार दिनों में दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हो गई? उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों ने पूरे साल हवा को साफ रखने के लिए प्रयास किए, लेकिन पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं के कारण राजधानी की हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब दिल्ली की हवा साफ थी, तब तक पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं शुरू नहीं हुई थीं। फिलहाल पंजाब में पराली जलाने के मामले प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। एक तरफ किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो दूसरी तरफ दिल्ली की खराब होती हवा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं पर कितनी रोक लगा पाता है।




















