कैबिनेट ने औद्योगिक नियमों में बदलाव, यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कमेटी गठन,महिलाओं को रजिस्ट्रेशन में छूट,सैनिकों को राहत और खनन नियमों को सख्त बनाने जैसे बड़े निर्णय लिए हैं, जिससे प्रशासनिक सुधार और विकास को गति देने की कोशिश की गई है।
कैबिनेट ने औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियमों में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे सेवा क्षेत्र को स्पष्ट पात्रता मिलेगी और भूमि आवंटन की प्रक्रिया अधिक संतुलित होगी। लैंड बैंक प्लॉट्स के लिए एप्रोच रोड का प्रावधान किया गया है, जिससे उद्योगों की पहुंच आसान होगी। NBFC और अन्य वित्तीय संस्थाओं को शामिल करने से उद्योगों के लिए फंडिंग के विकल्प बढ़ेंगे। शेयर होल्डिंग में बदलाव से जुड़े नियमों को भी सरल किया गया है, जिससे कंपनियों को संचालन में आसानी होगी। PPP मॉडल को स्पष्ट रूप से लागू करने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और औद्योगिक ढांचे का विस्तार होगा।
राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है और इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया गया है। यह समिति विशेषज्ञों और आम लोगों से सुझाव लेकर प्रारूप तैयार करेगी, जिससे सभी धर्मों के लिए एक समान कानून की दिशा तय हो सके। वर्तमान में अलग-अलग पर्सनल लॉ होने से कई बार कानूनी जटिलताएं सामने आती हैं, जिन्हें खत्म करने की कोशिश की जा रही है। समिति डिजिटल माध्यम से भी सुझाव ले सकेगी, जिससे व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी।
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महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने उनके नाम पर होने वाले संपत्ति रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है। इस कदम से महिलाओं को संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि इससे सरकार को राजस्व में कमी का सामना करना पड़ेगा, लेकिन इसे सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह फैसला लंबे समय में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।
कैबिनेट ने सेवारत और भूतपूर्व सैनिकों के साथ-साथ उनकी विधवाओं को बड़ी राहत दी है। अब वे राज्य के भीतर 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट पा सकेंगे। यह निर्णय उन सैनिकों के लिए मददगार होगा जो सेवा के बाद स्थायी निवास की तलाश में रहते हैं। सरकार का मानना है कि यह कदम देश सेवा में लगे लोगों के प्रति सम्मान और सहयोग का प्रतीक है। इससे सैनिक परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।
खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में सख्ती बढ़ा दी है। लंबे समय से बंद खदानों के लिए संचालन अनिवार्य किया गया है और लापरवाही पर कड़े प्रावधान लागू होंगे। अवैध खनन पर 25 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है। रेत खदानों को सरकारी उपक्रमों को सौंपने से सप्लाई में सुधार होगा और एकाधिकार खत्म होगा। साथ ही रॉयल्टी से जुड़े नियमों को पूरे राज्य में एक समान लागू किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनेगी।