मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आ रही है। UAE से LPG लेकर आए दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच हैं। पहला टैंकर BW TYR 31 मार्च को मुंबई पहुंचा। यह जहाज रास अल खैमाह से रवाना हुआ था और करीब 6 दिन में भारत पहुंचा। वहीं दूसरा टैंकर BW ELM 1 अप्रैल को न्यू मैंगलोर के पास पहुंच गया।
दोनों जहाजों में कुल करीब 94,000 टन LPG लोड थी और 50 से अधिक भारतीय नाविक सवार थे। सरकार के अनुसार, अब तक 8 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी आशंकाएं कुछ हद तक कम हुई हैं।
इस तनाव के बीच ईरान संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के चीफ इब्राहिम अजीजी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं। अजीजी के मुताबिक अब 47 साल की मेहमाननवाजी खत्म हो चुकी है और यह समुद्री रास्ता केवल उन्हीं देशों के लिए उपलब्ध होगा जो ईरान के नए नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प का ‘रेजीम चेंज’ जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्री नियमों में दिख रहा है।
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यूनाइटेड नेशंस डेवलेपमेंट प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा संघर्ष पूरे मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। अनुमान है कि क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है, जबकि कुल नुकसान ₹18 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई है और कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और ईरान की सरकार के बीच तनाव बढ़ने की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और IRGC के बीच सत्ता को लेकर खींचतान जारी है। यह भी दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और गहरा गई है।
होर्मुज संकट पर 35 देशों की इमरजेंसी बैठकस्थिति को देखते हुए कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन इस सप्ताह 35 देशों की एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य आवाजाही बहाल करना और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो पूरे क्षेत्र में 16 लाख से 36 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। व्यापार, शिपिंग और ऊर्जा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा भी कई क्षेत्रों में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।