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Twisha Sharma Death Case : CBI ने शुरू की पड़ताल, गिरिबाला सिंह के घर 30 मिनट तक छानबीन

भोपाल के ट्विशा शर्मा केस को अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई (CBI) ने मंगलवार से पड़ताल शुरू कर दी है। सबसे पहले सीबीआई टीम सबसे पहले ट्विशा की ससुराल यानी रिटायर्ड जज के कटारा हिल्स स्थित घर पहुंची। यहीं ट्विशा ने आखिरी सांसें ली थी। इसके बाद ट्विशा के परिजनों से भी पूछताछ करेगी।
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CBI ने शुरू की पड़ताल, गिरिबाला सिंह के घर 30 मिनट तक छानबीन

भोपाल। ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसी ने केस संभालते ही बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू कर दी। पहले ही दिन सीबीआई की टीम उस घर पहुंची, जहां ट्विशा की मौत हुई थी। अधिकारियों ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया और मामले से जुड़े हर पहलू को समझने की कोशिश की। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी मौके पर मौजूद रही, लेकिन जांच की कमान पूरी तरह सीबीआई के हाथ में दिखाई दी। सीबीआई टीम का नेतृत्व डिप्टी एसपी निशु कुशवाहा कर रही हैं।

क्राइम सीन वाली जगह पर पहुंची टीम 

सीबीआई की टीम तीन वाहनों में घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के घर का करीब 30 मिनट तक बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने घर के अलग-अलग कमरों और उन स्थानों को देखा, जहां घटना से जुड़े अहम सुराग मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने घर में मौजूद परिस्थितियों और घटनास्थल की स्थिति का तकनीकी दृष्टि से विश्लेषण किया। इस दौरान दो महिला अधिकारी भी टीम का हिस्सा थीं, जिन्होंने मामले के संवेदनशील पहलुओं पर जानकारी जुटाई।

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परिवार और आसपास के लोगों से जुटाई जानकारी 

सीबीआई अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से भी बातचीत की और घटना के दिन तथा उससे पहले के घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। जांच एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्विशा की मौत से पहले घर के भीतर क्या परिस्थितियां बनी थीं। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई जल्द ही ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह से भी विस्तृत पूछताछ कर सकती है।

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FIR में दर्ज हुए गंभीर आरोप 

सीबीआई ने राज्य पुलिस द्वारा पहले से दर्ज एफआईआर को दोबारा दर्ज करते हुए मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। एफआईआर में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं को भी शामिल किया गया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या ट्विशा को शादी के बाद लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और क्या दहेज से जुड़े विवाद उनकी मौत की वजह बने।

आखिरी फोन कॉल बना जांच का अहम आधार 

एफआईआर के अनुसार, घटना वाली रात ट्विशा ने रात 9 बजकर 41 मिनट पर अपनी मां से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान पृष्ठभूमि में उनके पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी थी। इसके कुछ ही क्षण बाद फोन अचानक कट गया। परिवार के अनुसार, जब उन्होंने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की तो सास गिरिबाला सिंह ने फोन उठाकर सिर्फ इतना कहा कि ट्विशा अब इस दुनिया में नहीं रही। यह आखिरी कॉल अब सीबीआई जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि फोन कटने के बाद आखिर घर के भीतर क्या हुआ था।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाए सवाल 

ट्विशा की मौत को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनके शरीर पर मिले चोटों के निशानों को लेकर खड़ा हुआ है। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना बताया गया है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों के निशान मिले थे। डॉक्टरों के अनुसार, ये चोटें किसी भारी या भोथरी वस्तु से लग सकती हैं और ये चोटें मौत से पहले की थीं। यही वजह है कि मामला अब केवल आत्महत्या तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि संभावित साजिश और हिंसा के एंगल से भी जांच की जा रही है।

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दहेज, घरेलू हिंसा और पैसों के विवाद के आरोप 

ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया है कि 9 दिसंबर 2025 को शादी होने के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज से संतुष्ट नहीं था। परिवार का कहना है कि ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और पैसों के लेन-देन को लेकर परेशान किया जाता था। आरोप है कि इन परिस्थितियों से परेशान होकर वह मानसिक दबाव में थीं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वास्तव में दहेज और आर्थिक विवाद इस मामले की जड़ में थे या इसके पीछे कोई और कारण मौजूद है।

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सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच पर दिया जोर 

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से कराई जाएगी। अदालत ने पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों के परिवारों से अपील की कि वे मीडिया में बयानबाजी करने के बजाय जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष रखें। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक बयान जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं। अब पूरे मामले पर देशभर की नजरें टिकी हैं।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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