भारतीय नौसेना को मिला INS महेंद्रगिरी : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया कमीशन, बोले- आंध्र प्रदेश बनेगा देश का ड्रोन हब

भारतीय नौसेना की ताकत शनिवार को और बढ़ गई, जब विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरी को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी कमीशनिंग करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत अपनी हीरा उद्योग और बेंगलुरु आईटी सेक्टर के लिए जाना जाता है, उसी तरह आने वाले समय में आंध्र प्रदेश का यह क्षेत्र देश के ड्रोन हब के रूप में पहचान बनाएगा। अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती देगा।
विशाखापत्तनम में हुआ कमीशन, गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ स्वागत
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने INS महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना को समर्पित किया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। यह युद्धपोत प्रोजेक्ट-17A नीलगिरी श्रेणी का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे आधुनिक नौसैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
राजनाथ सिंह बोले- यह इलाका भविष्य में ड्रोन हब बनेगा
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कुरनूल में ड्रोन सिटी विकसित करने की योजना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत को डायमंड सिटी और बेंगलुरु को सिलिकॉन वैली कहा जाता है, मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन यह इलाका देश के ड्रोन हब के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि आज आंध्र प्रदेश भारत की रक्षा तैयारियों में हर क्षेत्र में योगदान दे रहा है। उनके मुताबिक, आसमान में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), समुद्र की गहराई में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के नेवल सिस्टम, बिना पायलट वाले क्षेत्र में कुरनूल के ड्रोन और समुद्र की सतह पर INS महेंद्रगिरी देश की रक्षा क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए राज्य सरकार और प्रदेशवासियों को बधाई भी दी।
स्वदेशी तकनीक से तैयार, 75 प्रतिशत से ज्यादा उपकरण देश में बने
INS महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सरकार के मुताबिक, इसके निर्माण में देश के कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) ने भी अहम भूमिका निभाई। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए।
हर तरह के समुद्री मिशन के लिए तैयार है महेंद्रगिरी
INS महेंद्रगिरी को आधुनिक हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस किया गया है। यह युद्धपोत हवाई हमलों का मुकाबला करने, समुद्री सतह पर दुश्मन के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करने और पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसके अलावा यह समुद्री सुरक्षा अभियान, खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू), मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) जैसे अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जरूरत पड़ने पर इसे हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भी लंबे समय तक तैनात किया जा सकता है।
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आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि बताया
कमीशनिंग से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया था। उन्होंने लिखा कि INS महेंद्रगिरी भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश में डिजाइन और निर्मित यह अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय रक्षा उद्योग, MSME क्षेत्र और स्वदेशी तकनीक की बढ़ती ताकत का प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि INS महेंद्रगिरी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भारत के संकल्प को और मजबूत करेगा।












