सलकनपुर मंदिर के नाम पर फर्जी चंदा वसूली! ट्रस्ट की चेतावनी- जाली रसीद से चंदा लेने वालों से रहें सावधान

सीहोर। देशभर के प्रमुख मंदिरों में चंदा और चढ़ावे को लेकर उठ रहे विवादों के बीच सीहोर जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विजयासन धाम सलकनपुर मंदिर का नाम भी चर्चा में है। मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को फर्जी रसीदों के जरिए चंदा वसूली करने वाले लोगों से सावधान रहने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर, मंदिर में आने वाली करोड़ों रुपये की दानराशि और चढ़ावे के सार्वजनिक लेखे-जोखे को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
फर्जी रसीदों से हो रही वसूली, ट्रस्ट ने जारी की चेतावनी

सलकनपुर देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने पत्र जारी कर बताया कि कुछ लोग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों से घूम-घूमकर मां विजयासन धाम और भंडारा कराने के नाम पर नकली रसीदें देकर नकद राशि और अन्नदान एकत्रित कर रहे हैं। इस संबंध में ट्रस्ट को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट ने किसी भी व्यक्ति या संस्था को गांव-गांव जाकर चंदा या अन्नदान एकत्रित करने के लिए अधिकृत नहीं किया है।
श्रद्धालुओं से आधिकारिक माध्यम से ही दान करने की अपील
ट्रस्ट अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को माताजी के नाम पर नकद राशि या अन्नदान न दें। यदि कोई दान करना चाहता है तो वह मंदिर परिसर के अधिकृत दान काउंटर पर रसीद प्राप्त कर राशि जमा करे या ट्रस्ट के अधिकृत बैंक खाते में ऑनलाइन दान करे। उन्होंने कहा कि फर्जी वसूली करने वालों की सूचना तत्काल मंदिर प्रबंधन या पुलिस को दी जाए।
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दान और चढ़ावे की पारदर्शिता पर फिर बहस
सलकनपुर मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का नकद चढ़ावा, सोना-चांदी के आभूषण और कीमती वस्त्र श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाते हैं। इसी को लेकर कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा सहित कई लोगों ने पहले भी मंदिर की आय-व्यय और चढ़ावे का सार्वजनिक विवरण जारी करने तथा स्वतंत्र जांच की मांग उठाई थी। उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
ट्रस्ट अध्यक्ष बोले- एक-एक रुपए का हिसाब है
ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मंदिर का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित है और एक-एक रुपए का हिसाब रखा जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के अनुसार कोई भी व्यक्ति जानकारी प्राप्त कर सकता है। उनके अनुसार कुछ लोग तथ्यों के बजाय भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है।
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आस्था के नाम पर धोखाधड़ी से बचने की अपील
मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यम से ही दान करें और किसी भी फर्जी रसीद या संदिग्ध व्यक्ति के झांसे में न आएं। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और दान की पवित्रता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा फर्जी चंदा वसूली करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दानराशि और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों ने इस पूरे मामले को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।












