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बांधवगढ़ में बाघ की मौत पर गहराया रहस्य,गर्मी और ट्रैंक्यूलाइज दवा के ओवरडोज पर उठे सवाल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत पर सस्पेंस गहराया है। विशेषज्ञों ने भीषण गर्मी, डिहाइड्रेशन और ट्रैंक्यूलाइज दवा के ओवरडोज को संभावित वजह बताया है। एनटीसीए ने मामले में दोबारा जांच शुरू कर दी है।
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गर्मी और ट्रैंक्यूलाइज दवा के ओवरडोज पर उठे सवाल
फाइल फोटो

मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक ग्रामीण महिला पर हमले के बाद मारे गए बाघ की मौत अब सवालों के घेरे में आ गई है। शुरुआती जांच के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह तेज गर्मी, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और उसे पकड़ने के दौरान दी गई बेहोशी की दवा का असर हो सकता है। इस मामले को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी नजर रखनी शुरू कर दी है और बाघ के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया है। बाघ की मौत के बाद वन विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई जानवर गर्मी से परेशान हो और उसके शरीर में पानी की कमी हो, तो ऐसे समय में बेहोशी की दवा देना उसके लिए खतरनाक साबित हो सकता है और उसकी हालत और बिगड़ सकती है।

गर्मी और डिहाइड्रेशन ने बढ़ाया खतरा

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ को बेहोश करने के लिए जायलोजिन जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं की मात्रा बाघ के वजन, उसकी शारीरिक स्थिति और मौसम को देखकर तय की जाती है। यदि जानवर पहले से भूखा-प्यासा हो या डिहाइड्रेशन का शिकार हो, तो दवा का असर सामान्य से कहीं ज्यादा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में ब्लड प्रेशर तेजी से गिर सकता है और सांस लेने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे जानवर की मौत तक हो सकती है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सुदेश बाघमारे ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान बाघों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि साइबेरियाई मूल के बाघ भारतीय परिस्थितियों में खुद को ढाल चुके हैं, लेकिन लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी सहन करना उनके लिए आसान नहीं होता।

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मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक ने दी अलग जानकारी

वहीं इस मामले में मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा का बयान थोड़ा अलग है। उन्होंने कहा कि जब डॉक्टरों की टीम ने बाघ को ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए डार्ट मारा, उस समय उसमें किसी तरह की हलचल नहीं दिखाई दे रही थी। डॉ. समीता राजौरा के अनुसार शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि संभव है बाघ की मौत बेहोशी की दवा लगने से पहले ही हो चुकी हो। उन्होंने कहा कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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एनटीसीए ने बढ़ाई निगरानी, जबलपुर में हुआ दोबारा परीक्षण

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए ने भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी हुई है। एनटीसीए के निर्देश पर बाघ के शव का जबलपुर में दोबारा परीक्षण कराया गया। इस दौरान एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर, मुकुंदपुर और डब्ल्यूसीटी के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम मौजूद रही। जांच के दौरान बाघ के शरीर से करीब 15 अंगों के नमूने लिए गए हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई, ताकि जांच में किसी तरह की चूक न रहे। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं रिपोर्टों से यह साफ होगा कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या फिर ट्रैंक्यूलाइज प्रक्रिया के दौरान कोई गलती हुई।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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