Smriti Irani Birthday Special:तुलसी’ से केंद्रीय मंत्री तक… संघर्ष, पहचान और राजनीति का सफर

टीवी की दुनिया में ‘तुलसी’ के नाम से घर-घर में पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी आज अपना 50वां जन्मदिन मना रही हैं। 23 मार्च 1976 को जन्मीं स्मृति ईरानी की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और लगातार आगे बढ़ते रहने की मिसाल है।
तुलसी’ से केंद्रीय मंत्री तक… संघर्ष, पहचान और राजनीति का सफर
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    छोटे पर्दे की लोकप्रिय बहू से लेकर देश की केंद्रीय मंत्री बनने तक उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं कि आखिर कैसे एक साधारण लड़की ‘तुलसी’ बनी और फिर भारतीय राजनीति में मजबूत पहचान बनाई।

    संघर्ष भरे थे शुरुआती दिन

    स्मृति ईरानी का शुरुआती जीवन आसान नहीं रहा। करियर बनाने के लिए उन्होंने कई जगह कोशिश की। उन्होंने फ्लाइट अटेंडेंट बनने के लिए आवेदन किया, लेकिन वहां से उन्हें रिजेक्शन मिल गया। मॉडलिंग में भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और कई बार उन्हें नकार दिया गया। हालांकि इन असफलताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया। लगातार कोशिशों के बाद किस्मत ने करवट ली और साल 2000 में टीवी की दुनिया में उन्हें बड़ा मौका मिला।

    ‘तुलसी’ बनकर मिली घर-घर में पहचान

    साल 2000 में एकता कपूर के मशहूर टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में स्मृति ईरानी को “तुलसी” का किरदार मिला। यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि स्मृति को लोग उनके असली नाम से कम और ‘तुलसी’ के नाम से ज्यादा पहचानने लगे। इसी शो ने उन्हें टीवी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। इसी दौरान स्मृति ईरानी और एकता कपूर के बीच गहरी दोस्ती भी हुई, जो आज भी कायम है।

    पर्सनल लाइफ भी चर्चा में रही

    स्मृति ईरानी की निजी जिंदगी भी कई बार सुर्खियों में रही। उन्होंने साल 2001 में जुबिन ईरानी से शादी की। उस समय जुबिन पहले से शादीशुदा थे और उनकी एक बेटी भी थी। इसी वजह से इस शादी को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी हुईं। आज स्मृति और जुबिन के दो बच्चे,एक बेटा और एक बेटी हैं। वहीं जुबिन की पहली शादी से भी एक बेटी है।

    राजनीति में एंट्री और लगातार बढ़ता कद

    स्मृति ईरानी ने साल 2003 में भारतीय जनता पार्टी जॉइन की। इसके बाद राजनीति में उनका कद लगातार बढ़ता गया।

    • 2004 में महाराष्ट्र युवा विंग की उपाध्यक्ष बनीं
    • इसी साल दिल्ली की चांदनी चौक सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं
    • 2010 में बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव बनीं
    • महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली

    साल 2011 में वह राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचीं और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं।

    अमेठी की जीत ने बदल दी राजनीतिक पहचान

    2014 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली। हालांकि उनकी मेहनत जारी रही और 2019 के चुनाव में उन्होंने राहुल गांधी को हराकर बड़ी जीत दर्ज की। यह जीत उनकी राजनीतिक यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है। हालांकि 2024 के चुनाव में उन्हें इसी सीट से हार का सामना करना पड़ा।

    /img/118/1774194865494

    अब फिर टीवी पर लौटीं ‘तुलसी’

    राजनीति के साथ-साथ स्मृति ईरानी ने हाल ही में अपने लोकप्रिय शो‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में वापसी की है। कहानी में दिखाया जा रहा है कि तुलसी फिर से शांति निकेतन लौट आई है, लेकिन घर लौटने के बाद वह अपने बच्चों की जिंदगी में चल रही परेशानियों को लेकर चिंतित नजर आती है। वहीं नंदिनी और करण के रिश्ते में भी तनाव दिखाया गया है।

    /img/118/1774194898156

     स्मृति ईरानी की कहानी बताती है कि असफलताएं अंत नहीं होतीं। अगर हौसला बना रहे तो रिजेक्शन से लेकर पहचान तक का सफर तय किया जा सकता है और यही सफर उन्हें ‘तुलसी’ से देश की राजनीति का मजबूत चेहरा बना देता है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

    Latest Posts