
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान अचानक हुई फायरिंग से अफरा-तफरी मच गई। कार्यक्रम के बीच गोली चलने की आवाज सुनते ही वहां मौजूद लोगों को तुरंत झुकने और सुरक्षित जगह पर जाने के निर्देश दिए गए। मौके पर डोनाल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी और कई बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन सभी सुरक्षित रहे।
फायरिंग के तुरंत बाद यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस ने तेजी से मोर्चा संभाला और हालात पर काबू पाया। एक सुरक्षाकर्मी घायल हुआ, लेकिन बुलेटप्रूफ सुरक्षा के कारण उसकी जान बच गई। हमलावरों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस अमेरिका की एक विशेष एजेंसी है, जो राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, उनके परिवार और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा करती है। इसके अलावा यह एजेंसी आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच भी करती है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा मल्टी-लेयर सिस्टम पर आधारित होती है, जिसमें सैकड़ों प्रशिक्षित एजेंट, काउंटर स्नाइपर टीमें और खुफिया एजेंसियां शामिल रहती हैं। किसी भी बड़े कार्यक्रम से पहले पूरी जगह की गहन जांच की जाती है और सुरक्षा का विस्तृत प्लान तैयार होता है।
सीक्रेट सर्विस के एजेंट बनने के लिए बेहद कठिन सिलेक्शन प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। इसमें फिजिकल फिटनेस, मानसिक मजबूती, बैकग्राउंड चेक और कई स्तर की जांच शामिल होती है। बहुत कम उम्मीदवार इस प्रक्रिया को पार कर पाते हैं।

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एजेंट्स को भीड़ में सुरक्षा देना, खतरों की पहचान करना, हथियार चलाना और साइबर अपराध से निपटना सिखाया जाता है। वे अक्सर सामान्य कपड़ों में रहते हैं और हर समय अलर्ट मोड में काम करते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 1865 में इस एजेंसी की शुरुआत नकली नोटों पर रोक लगाने के लिए हुई थी। बाद में इसकी जिम्मेदारियां बढ़ीं और राष्ट्रपति की सुरक्षा भी इसमें शामिल कर दी गई।
आज सीक्रेट सर्विस न सिर्फ वीआईपी सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है, बल्कि वित्तीय अपराधों और साइबर धोखाधड़ी के मामलों की जांच में भी अग्रणी एजेंसी है। हालिया घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इसकी तेज कार्रवाई बड़े खतरे को टालने में कितनी अहम है।