बिलौआ में गिट्टी माफिया पर बड़ा बवाल:अवैध खनन रोकने वाले तहसीलदार पर ही सास के नाम खदान कराने का आरोप, SDM ऑफिस में हंगामा

ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के बिलौआ इलाके में गिट्टी माफिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस बार आरोप सीधे उस तहसीलदार पर लगे हैं जिन पर इलाके में अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी है। प्रभारी तहसीलदार दिव्य दर्शन शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सास के नाम गिट्टी खदान की रजिस्ट्री करवाई है। इतना ही नहीं खदान से जुड़े दस्तावेजों में खुद तहसीलदार गवाह के तौर पर मौजूद बताए जा रहे हैं जिनमें उनके हस्ताक्षर और फोटो भी शामिल हैं।
SDM कार्यालय पहुंचा मामला
मामला उस वक्त गरमा गया जब जिला पंचायत सदस्य नेहा परिहार के पति मुकेश परिहार ग्रामीणों के साथ SDM कार्यालय पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार दिव्य दर्शन शर्मा को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि प्रदीप खंडेलवाल की खदान पर 72 करोड़ रुपए का जुर्माना लगने के बाद उसी खदान को तहसीलदार ने अपनी सास के नाम करा दिया और अब वहां अवैध रूप से खनन कराया जा रहा है। ज्ञापन देने के बाद जब तहसीलदार ऑफिस से बाहर निकले तो मुकेश परिहार और ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई जिससे SDM कार्यालय परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई।
तहसीलदार बोले- मुझे बदनाम करने की साजिश
पूरे मामले पर तहसीलदार दिव्य दर्शन शर्मा ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह उन्हें बदनाम करने और ब्लैकमेल करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। हालांकि शिकायत सामने आने के बाद SDM ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दे दिए हैं।
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पहले भी विवादों में रहा नाम
जानकारी के मुताबिक दिव्य दर्शन शर्मा पहले बिलौआ में नायब तहसीलदार रह चुके हैं। उस दौरान भी उनका नाम माइनिंग विभाग की कार्रवाई में सामने आया था। बाद में ग्वालियर में पोस्टिंग मिलने के बाद उन्हें डबरा का प्रभारी तहसीलदार बनाया गया। अब एक बार फिर उनके ऊपर खदान से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं।
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इलाके में लंबे समय से सक्रिय है गिट्टी माफिया
बिलौआ क्षेत्र में लंबे समय से बड़ी संख्या में गिट्टी खदानें संचालित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण के चलते अवैध खनन का खेल लगातार जारी है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि अगर कार्रवाई करने वाले अफसरों के रिश्तेदार ही खदान कारोबार से जुड़े होंगे तो अवैध खनन पर रोक कैसे लगेगी। 72 करोड़ के जुर्माने के बाद खदान का सास के नाम होना अब इलाके में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह महज संयोग है या फिर किसी बड़े खेल का हिस्सा।












