Naresh Bhagoria
21 Jan 2026
दावोस। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के दौरान डेनमार्क को लेकर तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर खुली चेतावनी दी और कहा कि भले ही उन्हें ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों के प्रति पूरा सम्मान है, लेकिन ग्रीनलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता केवल अमेरिका के पास ही है। अपने भाषण के बीच ट्रंप ने अचानक ग्रीनलैंड का मुद्दा छेड़ते हुए कहा,'क्या आप चाहेंगे कि मैं ग्रीनलैंड पर कुछ शब्द कहूं?' उन्होंने बताया कि वह इस विषय को अपने भाषण से हटाने वाले थे, लेकिन ऐसा न करने पर कड़ी आलोचना के डर से उन्होंने इसे शामिल करना जरूरी समझा।
ट्रंप ने कहा कि हर नाटो सहयोगी की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम हो। उनके मुताबिक, ग्रीनलैंड को सुरक्षित रखने की ताकत सिर्फ अमेरिका में है। उन्होंने अमेरिका को ऐसी 'महान शक्ति' बताया, जिसे दुनिया अब भी पूरी तरह समझ नहीं पाई है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की अहमियत खनिज संसाधनों की वजह से नहीं, बल्कि उसकी रणनीतिक स्थिति के कारण है। उन्होंने कहा कि रूस और चीन के बीच स्थित ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यही वजह है कि उसे इस क्षेत्र की जरूरत है।
ट्रंप ने डेनमार्क पर सीधा हमला बोलते हुए उसे ‘अहसानफरामोश’ करार दिया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने डेनमार्क की रक्षा की थी, इसलिए डेनमार्क अमेरिका का कर्जदार है। उन्होंने दावा किया कि डेनमार्क महज छह घंटे की लड़ाई में जर्मनी के सामने घुटने टेक चुका था और न तो खुद को बचा पाया था, न ही ग्रीनलैंड को। ऐसे में अमेरिका को आगे आना पड़ा। ट्रंप ने उस वक्त ग्रीनलैंड को डेनमार्क के पास ही रहने देने के अमेरिकी फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा, 'हमने उसे वापस देकर कितनी बड़ी गलती कर दी। हमने ऐसा किया और बदले में हमें क्या मिला अहसानफरामोशी।'
ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में भाषण की शुरुआत की। उन्होंने मंच से 'बहुत सारे दोस्तों' और 'कुछ दुश्मनों' का जिक्र करते हुए श्रोताओं का अभिवादन किया, जिस पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा। इसके बाद ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिका की अर्थव्यवस्था, वैश्विक राजनीति और ऊर्जा नीति से जुड़े कई बड़े दावे किए।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जनता उन्हें चुनकर बेहद खुश है। उनके मुताबिक, दो साल पहले अमेरिका 'मरा हुआ देश' बन चुका था, लेकिन अब वह फिर से जीवित हो गया है और तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एक ठहरी हुई अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया, टैक्स बढ़ाने के बजाय घटाए और देश को विकास की राह पर लौटाया। ट्रंप ने आर्थिक मंदी के लिए पूर्व बाइडेन सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि डेमोक्रेट्स के शासनकाल में अमेरिका की प्रगति रुक गई थी। उनके अनुसार, अमेरिका की तरक्की का मतलब पूरी दुनिया की तरक्की है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने यूरोप पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यूरोप के कुछ हिस्से अब पहचान में ही नहीं आते। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें यूरोप से प्यार है, लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा। ट्रंप ने चिंता जताई कि यूरोप जिस रास्ते पर चल रहा है, वह उसे विकास से दूर ले जा सकता है।
वैश्विक हालात पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि मानव इतिहास का सबसे बड़ा सामूहिक पलायन दुनिया देख रही है। कई क्षेत्र उनकी आंखों के सामने तबाह हो रहे हैं, लेकिन या तो नेता हालात समझ नहीं पा रहे हैं या समझकर भी कोई कदम नहीं उठा रहे। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञों ने उनकी नीतियों को वैश्विक मंदी और महंगाई का कारण बताया था, लेकिन हकीकत इससे उलट साबित हुई।
ऊर्जा नीति पर जोर देते हुए ट्रंप ने कहा कि ऊर्जा से नुकसान नहीं, मुनाफा होना चाहिए। उन्होंने यूरोप में वामपंथी नीतियों की आलोचना करते हुए जर्मनी का उदाहरण दिया, जहां 2017 की तुलना में बिजली उत्पादन 22 प्रतिशत घट गया है।
ट्रंप ने यह दावा भी दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोका। अंत में ट्रंप ने परमाणु ऊर्जा और AI में अमेरिका की बढ़त का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब परमाणु ऊर्जा सुरक्षित और किफायती हो चुकी है और AI के क्षेत्र में अमेरिका चीन से भी आगे निकल चुका है।