वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अभी तक ईरान के बचे हुए महत्वपूर्ण ढांचों को पूरी तरह निशाना बनाना शुरू भी नहीं किया है। ट्रंप के मुताबिक, आने वाले समय में अमेरिकी हमलों का फोकस पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो सकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के नए नेतृत्व को स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए और जल्द फैसले लेने होंगे। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पहले ही क्षेत्र में तनाव चरम पर है और दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने हाल ही में ईरान में एक पुल पर किए गए हमले को रणनीतिक बताया है। उनका कहना है कि इस पुल का इस्तेमाल ड्रोन निर्माण में काम आने वाली सामग्री की सप्लाई के लिए किया जा रहा था, इसलिए इसे निशाना बनाया गया। वहीं, ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह एक आम नागरिकों के इस्तेमाल का पुल था और इसे नष्ट करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
ईरान ने इस कार्रवाई को युद्ध अपराध करार दिया है। इस मुद्दे ने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या सैन्य रणनीति के नाम पर नागरिक ढांचे को निशाना बनाना उचित है।
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यूनाइडेट नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में बहरीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर होने वाली अहम वोटिंग को फिलहाल टाल दिया गया है और अब यह शनिवार को होगी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बहरीन का कहना है कि यह कदम वैश्विक बाजार को स्थिर रखने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक में किसी भी तरह की रुकावट को रोकने के लिए जरूरी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक माल गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
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ब्रिटेन की पहल पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया, जिसमें भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हुए। इस दौरान भारत ने चिंता जताते हुए कहा कि इस पूरे संकट में अब तक केवल भारतीय नागरिकों की जान गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जो अलग-अलग विदेशी जहाजों पर कार्यरत थे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड एक बार फिर ऑपरेशन के लिए तैयार हो चुका है। अमेरिकी 6th फ्लीट के मुताबिक, यह जहाज क्रोएशिया के स्प्लिट बंदरगाह से रवाना होकर समुद्र में लौट आया है। गौरतलब है कि 12 मार्च को इस जहाज में लाल सागर में तैनाती के दौरान आग लग गई थी, जो जहाज के लॉन्ड्री सेक्शन में शुरू हुई थी।
हालांकि, अब इसे पूरी तरह ठीक कर लिया गया है और यह किसी भी संभावित मिशन के लिए तैयार है। इसके दोबारा सक्रिय होने से क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और मजबूत हो गई है, जिससे ईरान के साथ टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।