वॉशिंगटन DC। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया राष्ट्र संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर सीधा निशाना साधा। ट्रंप ने बिना नाम लिए ओबामा सरकार के दौरान हुए ईरान परमाणु समझौते को बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा कि उस समय लिए गए फैसलों का फायदा ईरान ने उठाया और अमेरिका की कमजोरी समझी।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने इस गलती को सुधारने का काम किया और उस समझौते को खत्म कर दिया, जिसे उन्होंने आपदा करार दिया।
अपने संबोधन में ट्रंप ने करीब 20 मिनट तक ईरान के साथ जारी संघर्ष पर बात की। उन्होंने एक तरफ जहां जीत का दावा किया, वहीं दूसरी ओर आने वाले समय में और हमलों के संकेत भी दिए। उन्होंने साफ कहा कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि आने वाले हफ्तों में यह और गंभीर मोड़ ले सकती है।
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ट्रंप ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि पिछले चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने तेज और बड़ी जीत हासिल की है। उनके मुताबिक यह जीत ऐसी है, जैसी बहुत कम देखने को मिलती है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब इस संघर्ष में मजबूत स्थिति में है और हालात उसके नियंत्रण में हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना अब लगभग खत्म हो चुकी है, वायुसेना कमजोर हो गई है और मिसाइल सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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ट्रंप ने अपने बयान में सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगले 2-3 हफ्तों में और कड़े हमले किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ी तो ईरान को पाषाण युग में पहुंचा दिया जाएगा।
ट्रंप ने अपने संबोधन में इस्राइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही उन्होंने NATO देशों पर नाराजगी जताते हुए उन्हें कागजी शेर कहा, यानी ऐसे देश जो सिर्फ दिखावे में मजबूत हैं।
ट्रंप ने दोहराया कि इस पूरे अभियान का मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। उन्होंने दावा किया कि अब ईरान इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पाएगा और उसका परमाणु कार्यक्रम लगभग खत्म हो चुका है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के अंदर नेतृत्व में बदलाव आया है। उनके मुताबिक पुराने कट्टरपंथी नेताओं की जगह अब एक कम सख्त समूह ने ले ली है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इसकी ज्यादा जरूरत नहीं है। उन्होंने चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस रास्ते को खुलवाने की जिम्मेदारी अब उनकी है।
ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को पिछले 47 साल से चले आ रहे अमेरिका-ईरान तनाव का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक युद्ध नहीं, बल्कि एक अंतिम हिसाब है, जिससे भविष्य की दिशा तय होगी।
ट्रंप का यह संबोधन साफ इशारा देता है कि अमेरिका अभी पीछे हटने के मूड में नहीं है। एक तरफ शांति की उम्मीद की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ हमलों की तैयारी भी जारी है। जंग थमी नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।