मिडिल ईस्ट में युद्ध की लड़ाई दुनिया की बड़ी कंपनियों तक पहुंच चुकी है। जिसमें आज Amazon के डाटा सेंटर पर हमला होने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहरीन में स्थित कंपनी के क्लाउड कंप्यूटिंग सेंटर को निशाना बनाया गया, जिससे इलाका एक बार फिर दहल गया है। इससे आगे भी कई बड़ी कंपिनयों पर बड़े अटैक की आशंका जताई जा रही है।
रॉयटर्स के अनुसार, बहरीन के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि हमले के बाद अमेजन के सुविधा केंद्र में आग लग गई थी। सिविल डिफेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन इस घटना में कंपनी के क्लाउड ऑपरेशन को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
इस हमले से एक दिन पहले ही IRGC ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एपल जैसी बड़ी कंपनियों के नाम शामिल थे। जिसे इस युद्ध की आग में उड़ाने की बात कही गई थी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट में एंट्री से साफ मना कर दिया है।
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IRGC ने साफ कहा था कि अगर ईरानी नेताओं पर टारगेटेड हमले जारी रहे, तो 1 अप्रैल से खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी कंपनियां उनके निशाने पर होंगी। बहरीन में अमेजन के डाटा सेंटर पर हुआ हमला इसी चेतावनी के बाद हुआ, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
IRGC की चेतावनी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर टिप्पणी करते हुए इसे हल्के में लिया था। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, किससे धमकाया, बीबी गन से... उनके पास अब ज्यादा कुछ नहीं बचा है। उनका यह बयान अब हमले के बाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
इस घटना के बाद मिडिल ईस्ट में काम कर रही अमेरिकी और अन्य विदेशी कंपनियों के बीच चिंता बढ़ गई है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और संभावित खतरों को देखते हुए कई कंपनियां अपने ऑपरेशन की समीक्षा कर रही हैं। वहीं बुधवार को स्ट्रेट होर्मुज से 2 भारतीय जहाज 94 हजार टन LPG लेकर भारत वापस आए हैं।
बहरीन सरकार और अन्य खाड़ी देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के हमले जारी रहे तो इसका असर वैश्विक टेक और व्यापार सेक्टर पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और हमले के पीछे की सटीक जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की जा रही है।