TMC से बगावत, NDA को समर्थन :20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, NCPI में विलय; एक फैसले से बदल गया संसद का गणित

पश्चिम बंगाल में TMC को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने NCPI में विलय का ऐलान कर दिया है। जानिए क्यों हुई बगावत, कौन है NCPI, क्या होगा TMC के चुनाव चिन्ह का भविष्य और आगे की राजनीतिक लड़ाई का पूरा गणित।
20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, NCPI में विलय; एक फैसले से बदल गया संसद का गणित
TMC के 20 लोकसभा सांसदों का NCPI में विलय

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत करते हुए नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया। इस कदम ने न केवल ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका दिया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का समीकरण भी बदल दिया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को औपचारिक पत्र सौंपने के बाद बागी सांसदों ने दावा किया कि, उनके पास पार्टी के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA के साथ काम करने की भी घोषणा कर दी।

स्पीकर से मुलाकात के बाद हुआ बड़ा ऐलान

रविवार शाम TMC के बागी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला। बैठक के बाद सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने घोषणा की कि उनका गुट अब NCPI में शामिल हो चुका है और संसद में अलग पहचान चाहता है। उन्होंने कहा कि बागी सांसद NDA के साथ मिलकर काम करेंगे और लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी स्पीकर से की गई है। स्पीकर से मुलाकात से पहले सांसदों ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की थी।

महुआ मोइत्रा का तीखा हमला

बगावत के बाद TMC की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय पर निशाना साधा। महुआ ने आरोप लगाया कि, सुदीप बंद्योपाध्याय ने बीमारी का बहाना बनाकर दिल्ली में राजनीतिक सौदेबाजी की और पार्टी के साथ विश्वासघात किया।

TMC

कौन-कौन सांसद हुए बागी?

TMC छोड़ने वाले प्रमुख सांसद

लोकसभा सीट

सांसद

बारासात

काकोली घोष दस्तीदार

कूचबिहार

जगदीश चंद्र बसुनिया

जांगीपुर

खलीलुर रहमान

बहरामपुर

यूसुफ पठान

मुर्शिदाबाद

अबू ताहेर खान

बैरकपुर

पार्थ भौमिक

मथुरापुर

बापी हलदार

जादवपुर

सायोनी घोष

कोलकाता दक्षिण

माला रॉय

आरामबाग

मिताली बाग

कोलकाता उत्तर

सुदीप बंद्योपाध्याय

घाटाल

दीपक अधिकारी (देव)

झाड़ग्राम

कालीपद सोरेन

मेदिनीपुर

जून मालिया

बांकुड़ा

अरूप चक्रवर्ती

बर्धमान पूर्व

डॉ. शर्मिला सरकार

हावड़ा

प्रसून बंद्योपाध्याय

बोलपुर

असित कुमार माल

बीरभूम

शताब्दी रॉय

हुगली

रचना बनर्जी

आखिर NCPI क्या है?

TMC से अलग हुए सांसदों ने जिस पार्टी का दामन थामा है, वह कोई बड़ी राष्ट्रीय पार्टी नहीं बल्कि त्रिपुरा की एक छोटी और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है।

NCPI की प्रोफाइल

विवरण

जानकारी

पूरा नाम

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI)

गठन

20 जनवरी 2023

दर्जा

चुनाव आयोग में पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त

चुनाव चिन्ह

पेन निब (कलम की नोक)

मुख्य क्षेत्र

त्रिपुरा

राष्ट्रीय अध्यक्ष

शेली कुंडू

पंजीकृत पता

हावड़ा, पश्चिम बंगाल

2023 त्रिपुरा चुनाव

बेहद कमजोर प्रदर्शन

त्रिपुरा चुनाव में कैसा रहा प्रदर्शन?

दिलचस्प बात यह है कि, आज राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बनी NCPI का चुनावी रिकॉर्ड बेहद मामूली रहा है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में सीमित सीटों पर चुनाव लड़ा था। कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। जिन सीटों पर चुनाव लड़ा गया, वहां पार्टी को सैकड़ों वोट ही मिले।

त्रिपुरा चुनाव में NCPI

सीट

वोट

छवामनु

536

कैलाशहर

286

अंबासा (समर्थित उम्मीदवार)

376

कई सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन NOTA के आसपास रहा था।

NCPI नेताओं को भी नहीं थी जानकारी!

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि, पार्टी से जुड़े कुछ पुराने नेताओं को भी TMC सांसदों के विलय की जानकारी पहले से नहीं थी। त्रिपुरा में पार्टी से जुड़े बरजेदा त्रिपुरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी और वे खुद यह खबर सुनकर हैरान हैं। बरजेदा वही उम्मीदवार हैं जिन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में 536 वोट मिले थे।

TMC के बागी सांसदों ने NCPI ही क्यों चुनी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा कारण दल-बदल विरोधी कानून है। यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो वे अयोग्यता से बच सकते हैं। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि, उनका गुट कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए NCPI में विलय कर चुका है। आगे चलकर वे TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी दावा कर सकते हैं।

West Bengal Politics

अब आगे क्या होगा?

1. संसद में अलग पहचान की मांग

बागी सांसद लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था चाहते हैं।

2. चुनाव चिन्ह पर विवाद

बागी गुट भविष्य में TMC के चुनाव चिन्ह ‘जुड़वा फूल’ पर दावा कर सकता है।

3. अदालत में होगी लड़ाई

असली TMC कौन है, इसका फैसला अंततः अदालत और चुनाव आयोग को करना पड़ सकता है।

4. NDA को मिलेगा फायदा

20 सांसदों के समर्थन से NDA को संसद में अतिरिक्त ताकत मिल सकती है।

कैसे बढ़ता गया TMC का संकट? पूरी टाइमलाइन

तारीख

घटनाक्रम

4 मई

विधानसभा चुनाव में हार के बाद असंतोष शुरू

22 मई

बागी नेताओं की भाजपा नेताओं से मुलाकात

31 मई

ममता की बैठक में बड़ी संख्या में विधायक नहीं पहुंचे

1 जून

दो नेताओं को पार्टी से निकाला गया

3 जून

58 विधायकों ने अलग नेतृत्व का समर्थन किया

8 जून

11 सांसदों की भाजपा नेताओं से बैठक

10 जून

राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा

13 जून

सायोनी घोष को यूथ विंग प्रमुख पद से हटाया गया

15 जून

20 सांसदों ने NCPI में विलय का ऐलान किया

राजनीतिक मायने क्या हैं?

20 सांसदों के एक साथ अलग होने से TMC की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है। दूसरी तरफ, NCPI जैसी लगभग निष्क्रिय पार्टी अचानक लोकसभा में बड़ी ताकत बनकर उभरी है। अगर यह विलय कानूनी रूप से मान्य रहता है तो सांसदों की संख्या के लिहाज से NCPI देश की प्रमुख संसदीय पार्टियों में शामिल हो सकती है। वहीं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने पार्टी को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

Latest Posts