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पत्नी से ‘तकरार’ तो होती है, लेकिन एक-दो दिन बाद ‘प्यार’ में बदल जाती हैं

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पत्नी से ‘तकरार’ तो होती है, लेकिन एक-दो दिन बाद ‘प्यार’ में बदल जाती हैं

पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल। मध्यप्रदेश कॉडर के आईएएस आईसीपी केशरी दो साल पहले सेवानिवृत्त हुए हैं, लेकिन वे आज भी अपने काम की गति में पीछे नहीं हैं। 1988 बैच के अधिकारी रहे केशरी वर्तमान में अडाणी ग्रुप में इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी के लिए सलाहकार हैं। अपर मुख्य सचिव पद तक पहुंचते हुए भी उन्होंने अपने व्यवहार को नम्र रखा। आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष रहते हुए वे कभी शैफ के तौर पर नजर आए तो कभी स्टेशन में चाय बेचने वाले की मिमिक्री करके साथियों को हंसाया।

पीपुल्स समाचार सप्ताह का अपना नया कॉलम ‘पीपुल्स समाचार के साथ’ प्रारंभ कर रहा है। प्रस्तुत है आईसीपी केशरी से नए अंदाज में बातचीत के प्रमुख अंश...

चक्काजाम खत्म किया फिर एसडीओ का चार्ज लिया

  • आज भी आप किसी युवा से कम नहीं, फिटनेस का राज क्या है?
  • जवाब: खाना-पीना ठीक रहता है। सप्ताह में एक-दो दिन नॉनवेज हो जाता है। कम से कम 5 दिन 6 किमी तक वॉक करता हूं।
  • सिविल सर्विस की तैयारी में कल और आज में कितना अंतर है?
  • जवाब: 8-10 घंटे की पढ़ाई जरूरी है। हमारे समय आरक्षण 30 प्रतिशत था, जिससे सामान्य वर्ग के लोगों को निकलने में ज्यादा अवसर थे। अब आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है तो कॉम्पटीशन बहुत बढ़ गया है।
  • आपकी पहली पोस्टिंग का क्या अनुभव रहा?
  • जवाब: पहली पोस्टिंग अगस्त 1990 में एसडीओ सीहोरा के पद पर हुई थी। प्रभार लेने से पहले चक्काजाम से सामना हुआ। आंदोलन खत्म कराने के बाद ही चार्ज लिया था।
  • ऐसा कहा जाता है कि सीहोरा की पोस्टिंग बहुत ही लकी है?
  • जवाब: यह सही है। यहां एसडीओ रहे आईएएस एमएस सेठी, निर्मला बुच, एससी बेहार, विजय सिंह और बसंत प्रताप सिंह बाद में मुख्य सचिव बने। मैं भी एसीएस तक पहुंचा जो सीएस स्केल के बराबर होता है।
  • कॉलेज लाइफ की कोई ऐसी यादें जो कभी नहीं भूलती।
  • जवाब: बिहार के सासाराम से दिल्ली विवि में पढ़ने आया था। मैंने पहली बार में ही विवि टॉप किया। तब मुझे सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रहे हंसराज खन्ना ने सम्मानित किया था। ये वही खन्ना थे जिन्होंने पीएम इंदिरा गांधी के रायबरेली लोकसभा चुनाव को इलाहाबाद कोर्ट द्वारा अवैध मानने के निर्णय को सही माना था।
  • पत्नी से तकरार तो होती ही होगी, उन्हें कैसे मनाते हैं?
  • जवाब: पत्नी से खूब बनती है, पर ज्यादातर बच्चों को लेकर तकरार भी होती है। तकरार भी 1-2 दिन ही रहती है। नाराजगी और तकरार तो ‘प्यार’ का एक हिस्सा है।
  • क्या आप खाना बनाते हैं और खाने में क्या पसंद है?
  • जवाब: चिकिन बिरयानी और मटन करी बहुत अच्छा बनाता हूं। चावल- दाल, आलू-भुजिया बहुत पसंद है।
  • कई बार युवा अपना रास्ता नहीं चुन पाते हैं, उन्हें कैसा मार्गदर्शन मिले?
  • जवाब: अपने दिल की आवाज सुनना चाहिए। मेरे पिता मुझे वकील बनाना चाहते थे। मैंने दिल की बात मानी और पहली बार में आईपीएस और दूसरी बार में आईएएस बना।

अपने दिल की आवाज सुनना चाहिए। मेरे पिता मुझे वकील बनाना चाहते थे। मैंने दिल की बात मानी और पहली बार में आईपीएस और दूसरी बार में आईएएस बना। - आईसीपी केशरी पूर्व आईएएस

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By People's Reporter
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