श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी : तत्काल सुनवाई से इलाहाबाद हाई कोर्ट का इनकार, कहा-जल्दबाजी की जरूरत नहीं

नेशनल डेस्क। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के धन के कथित दुरुपयोग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में इस समय कोई ऐसी परिस्थिति नहीं है, जिसके चलते प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। वहीं, राज्य सरकार पहले ही मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर चुकी है।
लंबित मामलों के बीच सुनवाई टालने का फैसला
सोमवार को यह याचिका लखनऊ बेंच के समक्ष सूचीबद्ध नए मामलों में 392वें क्रम पर थी। जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि अदालत पहले से ही बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई कर रही है, इसलिए इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की कोई आवश्यकता नहीं है।
राज्य सरकार की कार्रवाई का भी लिया संज्ञान
सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले का संज्ञान ले चुकी है और जांच की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में वर्तमान चरण में किसी विशेष जल्दबाजी का औचित्य नजर नहीं आता।
याचिकाकर्ता ने उठाए फंड के दुरुपयोग के सवाल
याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने अपनी याचिका में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच कराने और वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष पड़ताल की मांग की है।
CAG ऑडिट की भी उठी मांग
याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से मंदिर के चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन का विशेष ऑडिट कराने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे पूरे मामले की पारदर्शी जांच संभव हो सकेगी।
दान प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि भक्तों द्वारा दिए गए दान के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। साथ ही मंदिर ट्रस्ट के फंड मैनेजमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी की गई है।
आरोपों के बाद सरकार ने बनाई SIT
राम मंदिर में मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
डिजिटल सबूत जुटाने में जांच एजेंसी के सामने चुनौती
मामले की जांच कर रही SIT को डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहती है। इसके बाद फुटेज स्वतः डिलीट हो जाती है, जिससे पुराने रिकॉर्ड हासिल करना जांच एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।












