मेयर पद पर फंसी बाजी:शिंदे गुट की बड़ी मांग, 2.5 साल के लिए मेयर पद चाहिए, ये बताई वजह

शिंदे गुट का पार्षदों को होटल में रखना, 2022 की उस बगावत की भी यादें ताजा कर रहा है, जिसके कारण शिवसेना टूट गई थी। दरअसल, मई 2022 महाराष्ट्र सरकार में नगर विकास मंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ बगावत कर दी थी।
शिंदे गुट की बड़ी मांग, 2.5 साल के लिए मेयर पद चाहिए, ये बताई वजह
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मुंबई। बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता-समीकरण अचानक उलझ गए हैं। मुंबई के निकाय चुनाव में पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे उसके खाते में मेयर पद जाने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं। लेकिन सत्ता का यह रास्ता आसान नहीं दिख रहा। महायुत के सहयोगी एकनाथ शिंदे ने अपने गुट के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा स्थित होटल ताज लैंड्स एंड में ठहरा दिया है, जहां कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

    क्या है शिंदे गुट का तर्क?

    सूत्रों के मुताबिक शिंदे गुट का तर्क है कि वर्ष 2026 शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष है, ऐसे में कम से कम ढाई साल तक बीएमसी का मेयर शिवसेना का ही होना चाहिए। इसी मांग को लेकर भाजपा और शिंदे गुट के बीच खींचतान शुरू हो गई है। इस बीच उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने रविवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि खुद एकनाथ शिंदे नहीं चाहते कि बीएमसी में भाजपा का मेयर बने, इसी वजह से वे अपने पार्षदों को होटल में ‘सुरक्षित’ रखे हुए हैं।

    इधर, शिवसेना UBT का बड़ा दावा 

    उधर, चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी शिवसेना (UBT) ने भी सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर “भगवान की इच्छा” हुई तो बीएमसी का मेयर उनकी पार्टी का भी हो सकता है। इस बयान के बाद मुंबई की राजनीति में अटकलों का दौर और तेज हो गया है। बता दें महाराष्ट्र नगर- निगम चुनाव में भाजपा को अकेले कुल 89 सीटें मिली है। 

    होटल पॉलिटिक्स में पहुंची राजनीति

    बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद मुंबई की राजनीति एक बार फिर ‘होटल पॉलिटिक्स’ के दौर में पहुंचती दिख रही है। 227 वार्डों वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका में भाजपा ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के खाते में 29 वार्ड आए हैं। बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है, जिसे छूने के लिए भाजपा को शिंदे गुट के समर्थन की अनिवार्य जरूरत है।

    हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट के ‘मराठी कार्ड’ के चलते शिंदे गुट की ताकत सीमित रह गई है। ऐसे में अब शिंदे गुट ने मेयर पद को लेकर बड़ा सियासी दांव चला है। संकेत साफ हैं कि अगर भाजपा ने यह मांग नहीं मानी, तो गठबंधन के समीकरण बिगड़ सकते हैं और सत्ता की तस्वीर बदल सकती है।

    होटल में ही ठहरे 29 पार्षद

    इसी आशंका के चलते शिंदे ने फैसला किया है कि पार्टी नेता का चुनाव होटल में ही किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, हॉर्स-ट्रेडिंग की किसी भी संभावना को रोकने के लिए सभी 29 पार्षदों को बांद्रा के होटल में ही ठहराया गया है। उन्हें बुधवार दोपहर तीन बजे तक होटल में रहने के निर्देश दिए गए हैं, यानी अगले तीन दिन तक वे बाहर नहीं निकलेंगे।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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