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टेनिस की नंबर-1 ‘शेरनी’ का फोटोशूट :सबालेंका बोलीं- मॉडल बन सकती थी, कोर्ट से बाहर बिल्कुल अलग इंसान

इंटरव्यू के दौरान सबालेंका ने अपनी पर्सनेलिटी को लेकर दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि वह दो अलग-अलग शख्सियतों के साथ जीती हैं।उन्होंने कहा, कोर्ट पर मैं बहुत आक्रामक और भावुक हो जाती हूं, क्योंकि वही मेरे खेल की जरूरत है।
सबालेंका बोलीं- मॉडल बन सकती थी, कोर्ट से बाहर बिल्कुल अलग इंसान

स्पोर्ट्स डेस्क। वर्ल्ड नंबर-1 टेनिस स्टार आर्यना सबालेंका इन दिनों अपने एक अलग अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। कोर्ट पर अपनी आक्रामक खेल शैली और दमदार शॉट्स के लिए पहचानी जाने वाली सबालेंका हाल ही में मैगजीन के कवर पर बेहद ग्लैमरस लुक में नजर आईं। नीले रंग के बड़े फर कोट और हाई हील्स में उनका फोटोशूट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस नए अंदाज ने उनके फैंस को चौंका दिया है, क्योंकि आमतौर पर उन्हें टेनिस कोर्ट पर जोश और ऊर्जा से भरे रूप में देखा जाता है।

मेरे अंदर दो अलग-अलग शख्सियत हैं

इंटरव्यू के दौरान सबालेंका ने अपनी पर्सनेलिटी को लेकर दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि वह दो अलग-अलग शख्सियतों के साथ जीती हैं।उन्होंने कहा, कोर्ट पर मैं बहुत आक्रामक और भावुक हो जाती हूं, क्योंकि वही मेरे खेल की जरूरत है। लेकिन कोर्ट से बाहर मैं बिल्कुल अलग हूं शांत, सुकून पसंद है और लोगों को गले लगाने वाली।

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टेनिस नहीं होता तो बॉक्सिंग या मॉडलिंग करती

जब उनसे पूछा गया कि अगर वह टेनिस खिलाड़ी नहीं होतीं तो क्या करतीं, तो सबालेंका ने मुस्कुराते हुए कहा कि शायद वह बॉक्सिंग या मॉडलिंग में होतीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, शायद मैं प्लस-साइज मॉडल बनती, क्योंकि उसमें भी मैं अच्छी होती। मुझे अपनी ऊर्जा और आक्रामकता निकालने के लिए जिंदगी भर कुछ न कुछ करना होगा।

पिता से मिली फाइटिंग स्पिरिट

सबालेंका की मजबूती और जुझारूपन के पीछे उनके पिता सर्गेई सबालेंका का बड़ा योगदान रहा है, जो खुद एक पेशेवर हॉकी खिलाड़ी थे। 2019 में मेनिन्जाइटिस के कारण 43 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था। इस कठिन दौर को याद करते हुए सबालेंका ने कहा, मेरे पिता ने मुझे सिखाया कि हर हाल में मजबूत और सकारात्मक रहना है। जब मैंने उन्हें खोया, तब टेनिस ने ही मुझे संभाला। अगर टेनिस नहीं होता, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती।

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मुश्किल दौर ने बनाया और मजबूत

सबालेंका ने 2022 के उस कठिन समय को भी याद किया, जब वह सर्विस करना तक भूल गई थीं। उन्होंने इसे अपने करियर का सबसे बुरा दौर बताया। उन्होंने कहा, सोचिए, आप पूरी जिंदगी एक चीज करते हैं और अचानक उसे सही से कर ही नहीं पाते। मैं हार मानने वाली थी, लेकिन उसी दौर ने मुझे और मजबूत बना दिया।

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भावनाएं जाहिर करना भी जरूरी

सबालेंका का मानना है कि मुश्किल समय से निकलने के लिए खुद को काम में व्यस्त रखना जरूरी है, लेकिन भावनाओं को दबाना नहीं चाहिए।उन्होंने कहा कि रोना और अपने जज्बातों को बाहर निकालना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि यही चीज इंसान को अंदर से मजबूत बनाती है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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