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भोपाल में बदलता मौसम:10 साल में बढ़ा तापमान, 40 प्रतिशत तक बढ़ीं बीमारियां

भोपाल में बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण का असर अब साफ नजर आने लगा है। पिछले 10 सालों में शहर का औसत तापमान 0.2 से 0.3 डिग्री तक बढ़ गया है। इसके साथ ही बारिश में कमी और हवा की गुणवत्ता खराब होने से लोगों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। विश्व मौसम दिवस के मौके पर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।
10 साल में बढ़ा तापमान, 40 प्रतिशत तक बढ़ीं बीमारियां
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल

    भोपाल में बदलता मौसम और बढ़ता प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बन चुका है। अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। 

    तापमान और बारिश में बदलाव

    मौसम विभाग के अनुसार बीते 15-20 सालों में भोपाल का मौसम पैटर्न बदल गया है। मानसून की एंट्री अब करीब 7 दिन लेट हो रही है, जो पहले 13 जून को होती थी, अब 21 जून के आसपास हो रही है। वहीं मानसून की विदाई भी 4 दिन आगे खिसक गई है। बारिश में हर साल औसतन 1.81 मिलीमीटर की कमी दर्ज की जा रही है। अगस्त और सितंबर के तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे गर्मी का असर लंबे समय तक बना रहता है।

    प्रदूषण बढ़ा, हवा की गुणवत्ता बिगड़ी

    शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीट और घटते पेड़ पौधों की वजह से प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में भोपाल का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 20 से 25 अंक तक बढ़ गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक हवा में पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे हानिकारक कणों की मात्रा बढ़ रही है, जो सीधे फेफड़ों और दिल पर असर डालते हैं। कई इलाकों में यह स्तर सुरक्षित सीमा से दोगुना तक पहुंच गया है।

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    सेहत पर गहरा असर, बीमारियां बढ़ीं

    बदलते मौसम और प्रदूषण का असर अब लोगों की सेहत पर भी साफ दिख रहा है। अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10-15 सालों में मौसमी बीमारियों के मरीज 25-30 फीसदी से बढ़कर 45-50 फीसदी तक पहुंच गए हैं। वायरल बुखार, हीट स्ट्रोक और एलर्जिक ब्रोंकाइटिस के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके अलावा हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के केस भी करीब 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है, जिससे सामान्य बीमारियां भी लंबे समय तक परेशान कर रही हैं।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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