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वैज्ञानिकों का कमाल! ‘खुद को ठीक’ करने वाली इलेक्ट्रॉनिक स्किन तैयार, जानिए कैसे काम करेगा ये मटेरियल

सिंगापुर की NUS के वैज्ञानिकों ने Self-Healing इलेक्ट्रॉनिक स्किन के लिए IDBS नाम का नया मटेरियल तैयार किया है। यह खराब होने के बाद खुद को ठीक कर सकता है और इस्तेमाल के बाद रिसाइकिल भी किया जा सकता है। जानिए इसकी खासियत, टेस्ट के नतीजे और स्मार्टवॉच व हेल्थ डिवाइस में इसके संभावित इस्तेमाल के बारे में।
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वैज्ञानिकों का कमाल! ‘खुद को ठीक’ करने वाली इलेक्ट्रॉनिक स्किन तैयार, जानिए कैसे काम करेगा ये मटेरियल
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कल्पना कीजिए कि आपकी स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड या वर्चुअल रियलिटी ग्लव पर खरोंच या हल्की दरार आ जाए और कुछ समय बाद वह अपने आप इसांनो की स्किन की तरह ठीक हो जाए। सुनने में यह किसी फिल्म की टेक्नोलॉजी जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसी Self-Healing इलेक्ट्रॉनिक स्किन तैयार की है। इसकी खास बात यह है कि इस्तेमाल के बाद इस मटेरियल को दोबारा रिसाइकिल भी किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने तैयार किया खास मटेरियल

सिंगापुर की National University of Singapore (NUS) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सॉफ्ट और लचीला मटेरियल तैयार किया है, जो खराब होने के बाद खुद अपनी मरम्मत कर सकता है। यह इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को मजबूती से पकड़े रखता है और जरूरत खत्म होने पर इसे रिसाइकिल भी किया जा सकता है। इस रिसर्च के नतीजे नेचर सस्टेनेबिलिटी जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।

क्या है IDBS?

वैज्ञानिकों ने इस नए मटेरियल को Intrinsically Dynamic Biosubstrate यानी IDBS नाम दिया है। इसे खासतौर पर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें लगातार मोड़ना और खींचना पड़ता है। IDBS को बनाने में दो प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया गया है। पहली है लिपोइक एसिड, जो जीवित कोशिकाओं में पाया जाता है। दूसरी है फाइटिक एसिड, जो बीजों और अनाजों में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। वैज्ञानिकों ने इन दोनों को बिना खतरनाक सॉल्वेंट या अलग केमिकल कैटेलिस्ट के गर्म करके एक खास नेटवर्क तैयार किया।

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बार-बार मुड़ने से खराब हो जाते हैं वियरेबल्स

आजकल स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, हेल्थ सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक स्किन जैसे डिवाइस काफी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इन्हें शरीर की हरकत के साथ बार-बार मुड़ना और खिंचना पड़ता है। इस वजह से इनके अंदर लगे बेहद पतले मेटल सर्किट धीरे-धीरे अपनी जगह से अलग हो सकते हैं। कई बार छोटी सी दरार भी सेंसर को काम करने से रोक देती है। इसके अलावा, कई फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पेट्रोलियम से बने प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें बाद में रिसाइकिल करना आसान नहीं होता।

चोट लगे तो खुद शुरू हो जाती है मरम्मत

IDBS की सबसे खास खूबी इसका Self-Healing फीचर है। जब मटेरियल को नुकसान पहुंचता है तो इसके कुछ केमिकल बॉन्ड टूट जाते हैं। लेकिन ये बॉन्ड दोबारा जुड़ सकते हैं और मटेरियल खुद को रिपेयर कर लेता है। लैब टेस्ट में इसके एक वर्जन को उसकी सामान्य लंबाई से आठ गुना से ज्यादा खींचा गया। इसके बाद भी यह कमरे के सामान्य तापमान पर करीब छह घंटे में अपनी 80 प्रतिशत से ज्यादा मजबूती वापस हासिल करने में सफल रहा।

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पांच बार नुकसान के बाद भी मजबूत

इस मटेरियल की खासियत सिर्फ एक बार खुद को ठीक करना नहीं है। वैज्ञानिकों ने नुकसान पहुंचाने और फिर उसके ठीक होने की प्रक्रिया को पांच बार दोहराया। इसके बाद भी IDBS ने अपनी 90 प्रतिशत से ज्यादा मजबूती वापस हासिल कर ली। यानी बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी Self-Healing क्षमता काफी हद तक बनी रही।

मेटल सर्किट को भी मजबूती से पकड़ेगा

वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स में सिर्फ लचीलापन होना काफी नहीं है। इनके अंदर लगे मेटल कंडक्टर का बेस मटेरियल से मजबूती से जुड़ा रहना भी जरूरी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, IDBS कुछ आम फ्लेक्सिबल मटेरियल की तुलना में मेटल के साथ ज्यादा मजबूत बॉन्ड बना सकता है। इससे बार-बार मुड़ने और खिंचने पर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के अलग होने का खतरा कम हो सकता है।

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स्मार्ट हेल्थ डिवाइस में हो सकता है इस्तेमाल

रिसर्च टीम ने इस मटेरियल से कई प्रोटोटाइप भी तैयार किए हैं। इनमें ऐसी इलेक्ट्रॉनिक स्किन शामिल है, जो तापमान, सांस से बनने वाली नमी और शरीर की गतिविधियों को माप सकती है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने ऐसे इलेक्ट्रोड भी तैयार किए, जो दिल और मांसपेशियों की गतिविधि को रिकॉर्ड कर सकते हैं। यानी आने वाले समय में Self-Healing मटेरियल वाली इलेक्ट्रॉनिक स्किन और वियरेबल डिवाइस हेल्थ मॉनिटरिंग से लेकर स्मार्ट गैजेट्स तक कई क्षेत्रों में काम आ सकती हैं।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani
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