चुनाव का समय हमेशा शोर, रैलियों और नारों से भरा होता है। लेकिन हर चुनाव में एक ऐसा मोड़ आता है, जब यह शोर अचानक थम जाता है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए आज ऐसा ही दिन है।
आज शाम 5 बजे से दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार पूरी तरह बंद हो जाएगा और ‘साइलेंस पीरियड’ लागू हो जाएगा। इसके बाद कोई भी पार्टी या उम्मीदवार सार्वजनिक रूप से वोट मांग नहीं सकेगा।
तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है। वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण की सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को वोटिंग तय है। इससे ठीक 48 घंटे पहले, यानी आज शाम से प्रचार पर ब्रेक लग जाएगा। यह नियम हर चुनाव में लागू होता है।
‘साइलेंस पीरियड’ यानी चुनाव से पहले का वह समय, जब प्रचार पूरी तरह बंद कर दिया जाता है। यह अवधि मतदान खत्म होने से ठीक 48 घंटे पहले शुरू होती है। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियां लगभग रुक जाती हैं। कोई रैली नहीं, कोई रोड शो नहीं, और न ही टीवी या सोशल मीडिया पर प्रचार। इसे आप चुनाव का कूल डाउन फेज कह सकते हैं।
साइलेंस पीरियड का नियम भारत के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत लागू होता है। इसके मुताबिक, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी तरह का चुनाव प्रचार करना गैरकानूनी है। अगर कोई इस नियम को तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
चुनाव सिर्फ वोट डालने का नाम नहीं है, बल्कि सही फैसला लेने की प्रक्रिया भी है। साइलेंस पीरियड इसी प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।
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1. सोचने का समय- जब प्रचार बंद होता है, तो मतदाताओं को बिना किसी दबाव के सोचने का मौका मिलता है कि उन्हें किसे वोट देना है।
2. शांति का माहौल- रैलियों और भाषणों के शोर के बिना माहौल शांत रहता है, जिससे चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सके।
3. प्रभाव से बचाव- अंतिम समय में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें रुक जाती हैं, जिससे वोटिंग ज्यादा पारदर्शी होती है।
इस दौरान कई चीजों पर सख्त पाबंदी लग जाती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं-
1. चुनाव प्रचार पूरी तरह बंद- कोई भी पार्टी या उम्मीदवार जनता से वोट मांगने के लिए भाषण या सभा नहीं कर सकता।
2. रैलियां और रोड शो नहीं- सड़कों पर निकलने वाले जुलूस, रोड शो और बड़े कार्यक्रम पूरी तरह से बंद हो जाते हैं।
3. मीडिया पर रोक- टीवी, रेडियो, अखबार और सोशल मीडिया पर चुनाव से जुड़े विज्ञापन या प्रचार नहीं दिखाए जा सकते।
4. ओपिनियन और एग्जिट पोल पर पाबंदी- इस दौरान कोई भी ओपिनियन पोल या एग्जिट पोल प्रसारित नहीं किया जा सकता।
5. अप्रत्यक्ष प्रचार भी मना- कोई संगीत कार्यक्रम, नाटक या मनोरंजन के जरिए भी वोट मांगने की अनुमति नहीं होती।
6. बाहरी नेताओं को जाना होगा- जो नेता या कार्यकर्ता उस क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, उन्हें प्रचार खत्म होते ही वहां से बाहर जाना होता है।
7. लाउडस्पीकर का इस्तेमाल बंद- चुनावी प्रचार के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है।
आज के डिजिटल दौर में यह सवाल अहम है। साइलेंस पीरियड में सोशल मीडिया पर भी चुनाव प्रचार करना नियमों के खिलाफ है। हालांकि, पहले से पोस्ट किए गए कंटेंट को हटाना जरूरी नहीं होता, लेकिन नए पोस्ट या विज्ञापन के जरिए वोट मांगना प्रतिबंधित है।