स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26:सर्वे टीम के आने से पहले भोपाल में तैयारी तेज, सफाई, सौंदर्यीकरण और कचरा प्रबंधन पर जोर

भोपाल में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। अगले 2-3 दिनों में केंद्रीय सर्वेक्षण टीम शहर में दस्तक दे सकती है। इस बार फोकस सिर्फ कागजी तैयारी पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली असली सफाई पर है। नगर निगम ने शहर को फर्स्ट इंप्रेशन रेडी बनाने के लिए तेजी से काम शुरू किया है। दीवारों पर पेंटिंग, स्वच्छता संदेश, और सौंदर्यीकरण के प्रयास जोरों पर हैं।
85 वार्ड, 40 स्कूल और हर कोना होगा स्कैन
इस बार सर्वेक्षण टीम का दायरा पहले से कहीं बड़ा है। टीम भोपाल के सभी 85 वार्डों में जाएगी और सफाई व्यवस्था का ग्राउंड लेवल पर निरीक्षण करेगी। इसके अलावा लगभग 40 स्कूलों में भी स्वच्छता की स्थिति जांची जाएगी। बच्चों के आसपास का वातावरण, कचरा प्रबंधन और जागरूकता स्तर भी रैंकिंग का हिस्सा होगा।
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नगर निगम ने दिए सख्त निर्देश
स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कचरा ट्रांसफर स्टेशनों की स्थिति सुधारने और मिश्रित कचरा संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। निगम प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दें, ताकि शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग मिल सके।
शहर को चमकाने की कोशिश जारी
नगर निगम ने शहर को आकर्षक दिखाने के लिए कई जगहों पर पेंटिंग, 3D आर्ट और स्क्रैप से बनी कलाकृतियां लगाई हैं। लगभग 60 हजार वर्गफीट क्षेत्र को इस तरह सजाया गया है।

स्वच्छता रैंकिंग कैसे तय होगी?
इस बार सिस्टम पूरी तरह डेटा और ग्राउंड रियलिटी पर आधारित है। रैंकिंग ऑन-ग्राउंड असेसमेंट, सिटीजन फीडबैक, विजिबल क्लीनलीनेस (1500 अंक), ODF/ODF++ और वॉटर प्लस (1000 अंक) और गारबेज फ्री सिटी रेटिंग (1000 अंक) जैसे पैरामीटर्स पर तय होगी।
बाजारों में सबसे बड़ी चुनौती
भोपाल के न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, कोलार, करोंद और बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में भी सफाई एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। नियम के अनुसार रिहायशी इलाकों में रोज एक बार सफाई, बाजार और स्टेशन और फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी है, लेकिन कई जगह यह सिस्टम अभी भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
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बैक लेन और गलियों पर खास फोकस
शहर की बैक लेन यानी पीछे की गलियां भी इस बार स्कोरिंग का बड़ा हिस्सा हैं। यहां सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय किए गए हैं। कई जगहों पर इन गलियों में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान चल रहे हैं, लेकिन स्थायी सुधार अभी बाकी है।
दीवारें साफ, लेकिन नीचे कचरा
150 अंकों वाले इस पैरामीटर में सार्वजनिक जगहों को साफ रखना जरूरी है खासतौर पर पान-गुटखे के निशान और खुले में गंदगी से मुक्त रखना। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह बैरिकेड्स और दीवारें खुद अनचाही गंदगी पॉइंट बन चुकी हैं।
3 करोड़ की पेंटिंग का काम
शहर में वॉल पेंटिंग, म्यूरल्स और आर्टवर्क पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ गड्ढामुक्त सड़क और ग्रीनरी बढ़ाने की कोशिश भी हो रही है। शहर में कुछ जोन में सफाई पूरी हो चुकी है। भानपुर में 50 करोड़ रुपए की लागत से एसटीपी प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा।
आदमपुर कचरा खंती- बड़ी चुनौती
भोपाल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द आदमपुर कचरा खंती है। यहां जमा पुराना कचरा (legacy waste) आज भी वैसा ही है। कचरे का पहाड़, गंदा पानी का रिसाव और बार-बार आग लगने की घटनाएं। यह सब मिलकर शहर की रैंकिंग को हर साल नीचे खींचते हैं।











