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ईरान होर्मुज में लाएगा नया ट्रैफिक सिस्टम : खास सर्विस पर टैक्स लगेगा, UAE-ओमान को दी चेतावनी

चीन और रूस दोनों ने कहा है कि होर्मुज संकट का हल युद्ध नहीं, बल्कि स्थायी सीजफायर है। चीन ने अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का विरोध भी किया। इसका मतलब साफ है कि अब यह सिर्फ ईरान बनाम अमेरिका का मामला नहीं रह गया, बल्कि बड़ी ताकतें भी खुलकर पक्ष लेने लगी हैं।
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खास सर्विस पर टैक्स लगेगा, UAE-ओमान को दी चेतावनी
सीजफायर के बाद भी हर्मुज के हालात सामान्य नहीं है

तेहरान। ईरान ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब वह सिर्फ चेतावनी नहीं देगा, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और भी मजबूत करेगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि जल्द ही जहाजों की आवाजाही के लिए नया सिस्टम लागू होगा। इसके तहत वही देश और कारोबारी जहाज आसानी से गुजर पाएंगे, जो ईरान के साथ सहयोग करेंगे। खास सेवाओं के लिए टैक्स भी देना होगा।

आखिर होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों का तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा यहां से गुजरता है। इसलिए यहां तनाव बढ़ने का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

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ईरान का नया सिस्टम क्या बदल सकता है?

ईरान अब यह संकेत दे रहा है कि वह तय करेगा कौन-सा जहाज आसानी से गुजरेगा और कौन नहीं। यानी अगर कोई देश ईरान विरोधी माना गया, तो उसके सैन्य सामान या कारोबारी जहाजों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरानी उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अब दुश्मन देशों के हथियार होर्मुज से नहीं गुजरने दिए जाएंगे। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ गई है।

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इसका असर क्या होगा?

अगर होर्मुज में तनाव बढ़ता है, तो सबसे पहले तेल की कीमतें उछल सकती हैं। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उन्हें महंगा पेट्रोल-डीजल झेलना पड़ सकता है।

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इनकी भी बढ़ेंगी मुश्किले

  1. शिपिंग और व्यापार महंगा हो सकता है
  2. खाड़ी देशों में सैन्य तनाव बढ़ सकता है
  3. दुनिया में सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
  4. शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है

चीन और रूस क्यों आए ईरान के साथ?

चीन और रूस दोनों ने कहा है कि होर्मुज संकट का हल युद्ध नहीं, बल्कि स्थायी सीजफायर है। चीन ने अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का विरोध भी किया। इसका मतलब साफ है कि अब यह सिर्फ ईरान बनाम अमेरिका का मामला नहीं रह गया, बल्कि बड़ी ताकतें भी खुलकर पक्ष लेने लगी हैं।

लेबनान और इजराइल के बीच क्या है स्थिति?

इजराइल और लेबनान के बीच 45 दिन का सीजफायर बढ़ा जरूर है, लेकिन दक्षिण लेबनान में हमले जारी हैं। लगातार हिंसा के कारण लोग पलायन कर रहे हैं। वहीं UNICEF ने चेतावनी दी है कि लेबनान में करीब 7.7 लाख बच्चे मानसिक तनाव झेल रहे हैं। लगातार युद्ध और विस्थापन का असर आने वाले वर्षों तक दिखाई दे सकता है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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