सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे से जुड़ी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बदलाव की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि तकनीकी जांच रिपोर्ट में इस तरह हस्तक्षेप करना न्यायपालिका के दायरे में नहीं आता। यह मामला विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट से जुड़ा था जिसमें याचिकाकर्ता ने घटनाक्रम का पूरा टाइम चार्ट जोड़ने की मांग की थी।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिका दायर करने की मंशा पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, वे खुद सामने नहीं आए जबकि कोई अन्य व्यक्ति इस तरह की याचिका लेकर अदालत पहुंच गया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि हर मामले में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करना उचित नहीं होता।
याचिकाकर्ता सुरेश चंद श्रीवास्तव ने अदालत से मांग की थी कि AAIB की रिपोर्ट में:
उनका तर्क था कि इन जानकारियों से हादसे के असली कारण जैसे इंजन ‘सर्ज’, की पुष्टि हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह पूरा मामला तकनीकी विशेषज्ञता से जुड़ा है और जांच एजेंसियां ही इसे बेहतर तरीके से समझ सकती हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता की इस दलील को भी नहीं माना कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से रिपोर्ट में बदलाव जरूरी है। यहां तक कि अदालत ने यह सुझाव भी खारिज कर दिया कि AAIB याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार करे।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इसी तरह की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि किसी जांच रिपोर्ट को “रीड डाउन” करना न्यायपालिका का काम नहीं है। उसी फैसले को चुनौती देते हुए यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
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12 जून 2025 को एयर इंडिया की बोइंग 787-8 विमान (फ्लाइट AI171) अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 270 लोगों की जान चली गई थी। AAIB की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, विमान के दोनों इंजनों में ईंधन की सप्लाई लगभग एक सेकंड के अंतराल में बंद हो गई थी जिससे बड़ा हादसा हुआ।