Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Supreme Court ने कहा-देशभर के डिजिटल अरेस्ट केस की जांच करेगी CBI

डिजिटल अरेस्ट (Digital arrest) केस में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों के मामलों में पहली जांच शुरू करने के लिए पूरी स्वतंत्रता से कार्य करे।  वहीं राज्य सरकारों से कहा कि वे जांच एजेंसी की मदद करें।
Supreme Court ने कहा-देशभर के डिजिटल अरेस्ट केस की जांच करेगी CBI
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को देशभर में साइबर अपराधियों और धोखेबाजों द्वारा किए गए डिजिटल अरेस्ट (Digital arrest)  के संबंध में स्वत: संज्ञान मामले में कड़े निर्देश जारी किए। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि सीबीआई (CBI) डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों के मामलों में पहली जांच शुरू करने के लिए पूरी स्वतंत्रता से कार्य करे। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सीबीआई (CBI) को प्राथमिकी न होने पर भी साइबर अपराध करने के लिए इस्तेमाल किए गए खातों को फ्रीज करने का अधिकार है।

    कोर्ट ने दिया फ्री हैंड

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले पर देश की प्रमुख जांच एजेंसी को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए, हम इस स्पष्ट निर्देश के साथ आगे बढ़ते हैं कि सीबीआई सबसे पहले डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले के मामलों की जांच करे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई को उस ढांचे के तहत काम करने वाले बैंकरों की संलिप्तता की जांच करने की पूरी स्वतंत्रता होगी जहां बैंक खाते खोले गए हैं और डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों के लिए उनका उपयोग किया गया है। कोर्ट ने आरबीआई को भी पक्षकार बनाया है और उससे यह बताने में न्यायालय की सहायता करने के लिए प्रतिक्रिया मांगी है कि संदिग्ध खातों की पहचान करने औरतुरंत रोकने के लिए एआई/एमएल-आधारित प्रणालियों को कब तैनात किया जा सकता है।

    इंटरपोल की भी सहायता ले CBI

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत प्राधिकरण (मध्यस्थ) सीबीआई को पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। जिन राज्यों ने अभी तक सीबीआई को सामान्य सहमति नहीं दी है, उन्हें निर्देश दिया जाता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आईटी अधिनियम के तहत जांच के लिए ऐसा करे। न्यायालय ने यह भी कहा कि इन अपराधों के पैमाने व उनकी सीमा पार प्रकृति को देखते हुए, सीबीआई आवश्यकता पड़ने पर इंटरपोल से सहायता ले सकती है।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts