GOOGLE :एक छोटी सी स्पेलिंग मिस्टेक से बना दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन

क्या आप जानते हैं कि Google का असली नाम कुछ और था? Stanford University के दो छात्रों Larry Page और Sergey Brin ने जब सर्च इंजन बनाया तो उसका पहला नाम Backrub था. बाद में Googol नाम सोचकर डोमेन चेक किया गया, लेकिन एक स्पेलिंग मिस्टेक से Google नाम सामने आया. यही छोटी सी गलती आज दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन की पहचान बन चुकी है।
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एक छोटी सी स्पेलिंग मिस्टेक से बना दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    आज इंटरनेट पर कुछ भी ढूंढना हो तो सबसे पहले दिमाग में Google का नाम आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन का शुरुआती नाम Google नहीं था? दिलचस्प बात यह है कि ‘Google’ नाम भी किसी लंबी योजना का नतीजा नहीं था, बल्कि एक साधारण स्पेलिंग मिस्टेक की वजह से यह नाम दुनिया के सामने आया।

    स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से शुरू हुई कहानी

    गूगल की शुरुआत साल 1995 में Stanford University से हुई। यहां पढ़ने वाले दो छात्र Larry Page और Sergey Brin इंटरनेट पर मौजूद विशाल जानकारी को बेहतर तरीके से खोजने के लिए एक नया सिस्टम बनाने पर काम कर रहे थे।

    शुरुआत में दोनों के विचार कई मामलों में अलग थे और अक्सर उनके बीच बहस भी होती थी। लेकिन समय के साथ उनकी यही अलग सोच एक मजबूत साझेदारी में बदल गई। इसी साझेदारी ने आगे चलकर दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन की नींव रखी।

    पहला नाम था Backrub

    जब दोनों छात्र अपने हॉस्टल के कमरों में बैठकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, तब उन्होंने एक ऐसा सर्च सिस्टम बनाया जो वेबसाइटों के बीच मौजूद लिंक का विश्लेषण करता था। यह सिस्टम यह तय करता था कि कौन-सी वेबसाइट कितनी महत्वपूर्ण है, यह इस बात से समझा जाता था कि कितनी दूसरी वेबसाइटें उससे लिंक हो रही हैं। क्योंकि यह सिस्टम बैकलिंक का विश्लेषण करता था, इसलिए शुरुआती दौर में इस सर्च इंजन का नाम Backrub रखा गया।

    Googol नाम रखने का विचार

    कुछ समय बाद उन्हें लगा कि Backrub नाम उतना आकर्षक और प्रभावशाली नहीं है। इसके बाद नए नाम की तलाश शुरू हुई। इसी दौरान टीम ने Googol नाम पर विचार किया। Googol गणित का एक शब्द है, जिसका मतलब होता है 1 के बाद 100 शून्य। इस नाम के जरिए यह बताने की कोशिश थी कि यह सर्च इंजन इंटरनेट पर मौजूद बेहद विशाल डेटा को संभालने और खोजने की क्षमता रखता है।

    एक टाइपो ने बना दिया Google

    गूगल के नाम के पीछे असली कहानी यहीं से शुरू होती है। जब डोमेन नेम चेक किया जा रहा था, तब Sean Anderson नाम के एक छात्र ने गलती से Googol की जगह Google टाइप कर दिया। यह एक साधारण टाइपो था, लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि google.com डोमेन उपलब्ध था।

    Larry Page को यह नाम पसंद आ गया और उन्होंने उसी गलत स्पेलिंग वाले नाम को मंजूरी दे दी। इसके कुछ ही घंटों के अंदर यह डोमेन रजिस्टर कर लिया गया और इसी तरह दुनिया को Google नाम मिला।

    गैरेज से शुरू होकर बना टेक्नोलॉजी का दिग्गज

    आधिकारिक रूप से 4 सितंबर 1998 को Google की शुरुआत हुई। शुरुआती दिनों में कंपनी का काम एक छोटे से गैरेज से शुरू हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे यह एक छोटी स्टार्टअप से बढ़कर वैश्विक टेक कंपनी बन गई। आज Google सिर्फ सर्च इंजन नहीं है, बल्कि Gmail, Maps, Cloud, YouTube और कई डिजिटल सेवाओं के जरिए अरबों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

    4 सितंबर को स्थापना, लेकिन जन्मदिन 27 सितंबर को

    दिलचस्प बात यह है कि Google की स्थापना 4 सितंबर 1998 को हुई थी, लेकिन कंपनी हर साल 27 सितंबर को अपनी वर्षगांठ मनाती है। इस दिन Google अपनी उपलब्धियों और इंटरनेट की दुनिया में अपने योगदान को याद करता है।

    एक छोटी सी स्पेलिंग गलती से शुरू हुआ ‘Google’ नाम आज टेक्नोलॉजी की दुनिया की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है और शायद यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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