नई दिल्ली। वनतारा जो दुनियाभर में घायल, प्रताड़ित और आवारा जानवरों का सबसे बड़ा पुनर्वास केंद्र बन गया है। यहां दुनिया के विभिन्न कोने से शेर, चीता, भालू जैसे कई जानवार लाए जाते हैं और इनकी भरपूर देखभाल और जरूरी मेडिकल ट्रीटमेंट भी दिया जाता है। हाल ही में इस एनिमल कंजर्वेशन सेंटर को एक साल पुरे हुए हैं, जिसमें पीएम मोदी ने विषेश रूप से अनंत अंबानी की तारीफ करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज को बधाई दी है। हालांकि यहां लाए जा रहे पशु- पक्षियों की वाइल्डलाइफ इंपोर्ट्स की कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिसमें कोर्ट ने कई अहम टिप्पणी की है।
बता दें जामनगर में संचालित वनतारा के खिलाफ यह याचिका करणार्थम विरम नाम की फाउंडेशन ने लगाई थी। इसमें कहा गया था कि दुनियाभर से लाए जा रहे जानवर इंपोर्ट कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर रहे हैं। याचिका में केंद्र, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण प्रशासन को निर्देश देने के लिए लगाई गई थी।
जानवरों से जुड़े कानूनी प्रक्रिया पर लगाई याचिका की सुनवाई जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच कर रही थी। बेंच ने साफ तौर पर कहा कि यह मामला नया नहीं है इसकी सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी है। इस मामले में ऐसे कुछ भी सबूत नहीं मिले जो याचिका को सही ठहरा सके। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट भी कोर्ट को सौंप दी है।
जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने इस मामले की कानूनी प्रक्रिया पर कहा कि जानवरों को विदेशों से लाते समय सभी कानूनों का सही ढंग से पालन किया गया। इस दौरान किसी भा राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि ऐसी ही याचिका पर PIL पिछले साल भी कोर्ट में सामने आई थी। जिसमें कोर्ट ने SIT की क्लिन चीट को स्वीकार कर लिया था।
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