मथुरा। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर प्रदेश दौरे का दूसरा दिन आध्यात्मिक माहौल में बीता। शुक्रवार सुबह वह मथुरा के वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचीं, जहां उनकी मुलाकात प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से हुई। यह मुलाकात करीब 25 से 27 मिनट तक चली, जिसमें दोनों के बीच आध्यात्म, समाज और ब्रज की परंपरा को लेकर चर्चा हुई।
बताया जा रहा है कि, बातचीत के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने ‘नाम जप’ की महत्ता बताते हुए कहा कि यही मनुष्य के जीवन को सफल बनाने का सबसे सरल मार्ग है।
बारिश के बीच सुबह करीब 7 बजे राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ आश्रम पहुंचीं। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज को हाथ जोड़कर प्रणाम किया, जबकि संत ने राधे-राधे कहकर उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति के आश्रम पहुंचने पर संतों और आश्रम के शिष्यों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। आश्रम की ओर से राष्ट्रपति को माला, दुपट्टा और प्रसाद भेंट किया गया। साथ ही उन्हें चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आश्रम पहुंचकर संत प्रेमानंद महाराज को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इस पर संत ने मुस्कुराते हुए राधे-राधे कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।
राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद महाराज को उनके 56वें जन्मदिन की भी बधाई दी। महाराज का जन्मदिन गुरुवार यानी 19 मार्च को मनाया गया था। मुलाकात के दौरान आश्रम के भीतर का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और शांत रहा। कुटिया में सिर्फ राष्ट्रपति, उनके परिजन और संत के करीबी शिष्य ही मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि, संत प्रेमानंद महाराज के साथ बातचीत के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भाव-विभोर नजर आईं। संत ने उन्हें भक्ति, साधना और नाम जप के महत्व के बारे में बताया। बातचीत में ब्रज संस्कृति, आध्यात्मिक जीवन और समाज में धर्म की भूमिका जैसे विषय भी शामिल रहे। यह मुलाकात देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद और संत परंपरा के बीच एक खास संवाद के रूप में देखी जा रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और संत प्रेमानंद महाराज के बीच करीब 25 मिनट तक आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा हुई।
इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने परिवार के साथ आश्रम पहुंचीं। उनके साथ बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम, नातिनें आद्याश्री और नित्याश्री मौजूद थे। आश्रम में उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई थी और परिवार के साथ बैठकर उन्होंने संत से बातचीत की।
राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम और दोनों नातिनें आद्याश्री व नित्याश्री भी मौजूद थीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इन दिनों तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने अयोध्या और मथुरा के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। उनका कार्यक्रम कुछ इस तरह रह-
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दिन |
कार्यक्रम |
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पहला दिन |
अयोध्या में रामलला के दर्शन |
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दूसरा दिन |
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात |
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आगे का कार्यक्रम |
नीब करौरी बाबा आश्रम और रामकृष्ण मिशन अस्पताल |
अपने दौरे के पहले दिन राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचीं। यहां उन्होंने राम मंदिर में रामलला के दर्शन किए और मंदिर परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने मंदिर के दूसरे तल पर स्थित राम दरबार में राम यंत्र की स्थापना भी की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें मंदिर निर्माण और परिसर के विकास कार्यों की जानकारी दी। राष्ट्रपति ने कहा कि, अयोध्या वह पवित्र भूमि है जहां प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया। यहां आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
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अयोध्या से मथुरा पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने कई प्रमुख मंदिरों के दर्शन किए। उन्होंने इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। इस्कॉन मंदिर में उन्होंने भगवान कृष्ण-बलराम के दर्शन किए और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा की। यहां उन्होंने बच्चों से बातचीत भी की और उन्हें चॉकलेट दी।
प्रेम मंदिर में देखा लेजर शो
मथुरा के प्रसिद्ध प्रेम मंदिर में राष्ट्रपति ने राधा-कृष्ण के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर की सुंदर सजावट की काफी प्रशंसा की। मंदिर में आयोजित लेजर शो भी देखा और मंदिर परिसर की परिक्रमा की। इस दौरान संकीर्तन मंडली द्वारा गाए जा रहे भजनों से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ था।
बच्चों के कार्यक्रम की सराहना
इस्कॉन मंदिर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने नृत्य और भजन प्रस्तुत किए। राष्ट्रपति ने बच्चों की प्रस्तुति को काफी सराहा और कुछ समय मंदिर परिसर में ध्यान भी लगाया।
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राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे वृंदावन और मथुरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे। मंदिर परिसरों और आश्रमों में भी विशेष व्यवस्थाएं की गईं ताकि दर्शन और कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सकें।
वृंदावन में मुलाकात के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यक्रम आगे भी काफी व्यस्त है। वे इसके बाद नीब करौरी बाबा के आश्रम जाएंगी, रामकृष्ण मिशन अस्पताल का दौरा करेंगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे आधुनिक कैंसर यूनिट का उद्घाटन करेंगी।
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संत प्रेमानंद महाराज वृंदावन के प्रसिद्ध संतों में से एक हैं। उनके प्रवचन और भक्ति कार्यक्रम देशभर में काफी लोकप्रिय हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम शंभू नारायण पांडे और माता का नाम रामा देवी है। परिवार में तीन भाई हैं और प्रेमानंद महाराज मंझले हैं। बचपन में उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था।
प्रेमानंद महाराज बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की। बचपन में ही उन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक शिव मंदिर के लिए चबूतरा बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन जब कुछ लोगों ने इस निर्माण को रोक दिया तो उनका मन टूट गया और उन्होंने घर छोड़ने का फैसला कर लिया।
महज 13 साल की उम्र में अनिरुद्ध कुमार पांडे घर छोड़कर काशी पहुंच गए। वहीं उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का निर्णय लिया और उनका नाम आरयन ब्रह्मचारी रखा गया। काशी में उन्होंने करीब 15 महीने तक साधना और अध्ययन किया।
काशी में उन्हें गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा प्राप्त हुई। इसके बाद वह मथुरा आ गए और वृंदावन में रहकर भक्ति और साधना करने लगे।
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वृंदावन में रहते हुए प्रेमानंद महाराज रोजाना बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने जाते थे। धीरे-धीरे उनका झुकाव राधावल्लभ संप्रदाय की ओर बढ़ा। एक दिन उन्होंने एक श्लोक सुना, जिसका अर्थ समझने के लिए उन्होंने एक संत से पूछा। संत ने कहा कि, इस श्लोक को समझने के लिए राधावल्लभ परंपरा को अपनाना जरूरी है। इसके बाद प्रेमानंद महाराज इस परंपरा से जुड़ गए।
राधावल्लभ संप्रदाय को रस की उपासना के लिए जाना जाता है। इसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं जैसे रासलीला, वन विहार लीला और निकुंज लीला का विशेष रूप से वर्णन किया जाता है।
संत प्रेमानंद महाराज के कई प्रसिद्ध अनुयायी भी हैं। उनमें शामिल हैं-
इन सभी ने कई बार महाराज से मुलाकात कर उनके आशीर्वाद लिए हैं।