नई दिल्ली। मप्र में टोल वसूली से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इंदौर हाईकोर्ट इस याचिका पर दोबारा सुनवाई करते हुए तीन माह के भीतर निर्णय करे। यह याचिका पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि संबंधित टोल सड़कों पर परियोजना लागत से चार से छह गुना तक राशि वसूली जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने केस की सुनवाई की।
याचिकाकर्ता पारस सकलेचा ने बताया कि हमने कोर्ट को जानकारी दी कि जनवरी 2026 तक जावरा-नयागांव टोल रोड पर 426 करोड़ रुपए की लागत के मुकाबले करीब 2635 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है। इसी तरह लेबड़-जावरा टोल रोड पर 589 करोड़ रुपए की लागत के मुकाबले 2376 करोड़ रुपए और देवास-भोपाल टोल रोड पर 345 करोड़ रुपये की लागत के स्थान पर लगभग 2056 करोड़ रुपए टोल के रूप में वसूले जा चुके हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि टोल कंपनियों के स्वतंत्र ऑडिटर ने रखरखाव और ब्याज से जुड़े खर्चों को वास्तविक रिपोर्ट की तुलना में कई गुना अधिक दर्शाया है। साथ ही इन तीनों सड़कों पर जनवरी 2026 तक 10,691 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 8,314 लोग घायल हुए और 3,821 लोगों की मौत हुई।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले को नोएडा ब्रिज टोल विवाद से जुड़े फैसले के संदर्भ में प्रासंगिक माना और इंदौर हाईकोर्ट को याचिका पर शीघ्र सुनवाई का निर्देश दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह भी अनुमति दी कि वह 15 दिन के भीतर इंदौर हाईकोर्ट में नया आवेदन दाखिल कर सके और टोल रोड के निवेशकों सहित सभी प्रभावित पक्षों को मामले में पक्षकार बनाए। उल्लेखनीय है कि नोएडा ब्रिज टोल वसूली मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 में टोल वसूली निरस्त कर दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 20 दिसंबर 2024 को बरकरार रखते हुए कंपनी की याचिका खारिज कर दी थी। इसी फैसले को आधार बनाकर मौजूदा टोल विवाद की सुनवाई आगे बढ़ाई जाएगी।