शादी की सालगिरह पर गिरफ्तारी...राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी पर कार्रवाई, 900 करोड़ के JJM घोटाले में ACB ने की छापेमारी

जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़े करीब 900 करोड़ रुपए के कथित घोटाले में गुरुवार सुबह बड़ा घटनाक्रम सामने आया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व कैबिनेट मंत्री महेश जोशी को जयपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। ACB की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने यह कार्रवाई तड़के अंजाम दी। इस गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। बता दें कि, जिस दिन यह कार्रवाई हुई, उसी दिन जोशी की शादी की सालगिरह भी थी।
ACB ने सुबह 5 बजे घर से किया गिरफ्तार
ACB के अनुसार, टीम सुबह करीब 4:30 बजे जयपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित सन कॉलोनी में महेश जोशी के घर पहुंची। टीम ने वहां पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया और प्रारंभिक कार्रवाई के बाद सुबह करीब 5 बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जोशी को मेडिकल जांच के लिए जयपुरिया अस्पताल ले जाया गया, जहां जरूरी औपचारिकताएं पूरी की गईं। मेडिकल के बाद उन्हें ACB मुख्यालय लाया गया और बाद में अदालत में पेश करने की तैयारी की गई।
गिरफ्तारी से पहले मंदिर में की पूजा-अर्चना
गिरफ्तारी से पहले महेश जोशी ने ACB टीम से स्नान और मंदिर जाने की अनुमति मांगी। चूंकि उस दिन उनकी शादी की सालगिरह थी और वे मंदिर दर्शन का कार्यक्रम बना चुके थे, ऐसे में टीम ने उन्हें मानवीय आधार पर अनुमति दे दी। जोशी ने घर के पास स्थित शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्हें ACB मुख्यालय लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
जोशी बोले- मैं निर्दोष हूं, यह राजनीतिक षड्यंत्र है
गिरफ्तारी के बाद महेश जोशी ने मीडिया से बातचीत में खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें बिना किसी नोटिस के गिरफ्तार किया गया और उनसे किसी प्रकार की पूछताछ भी नहीं की गई। जोशी ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला राजनीतिक षड्यंत्र के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं होता। मैं जनता के विश्वास पर खरा उतरूंगा और खुद को बेगुनाह साबित करूंगा।
पहले ED भी कर चुकी है गिरफ्तार
यह मामला नया नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में महेश जोशी को गिरफ्तार किया था। उस समय वे करीब सात महीने तक जेल में रहे थे। बाद में 3 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। अब ACB की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
क्या है 900 करोड़ का जल जीवन मिशन घोटाला?
यह पूरा मामला केंद्र सरकार की ‘हर घर नल’ योजना यानी जल जीवन मिशन से जुड़ा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से जल पहुंचाना है। आरोप है कि इस योजना के तहत टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं की गईं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चहेती कंपनियों को करोड़ों रुपए के ठेके दे दिए गए।
जांच एजेंसियों का दावा है कि, अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह पूरा खेल रचा गया। आरोप है कि फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र लगाकर कंपनियों ने टेंडर हासिल किए और बदले में रिश्वत दी गई।
कंपनियों को कैसे मिला करोड़ों का काम?
जांच में सामने आया कि श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर हासिल किए। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी को करीब 859.2 करोड़ रुपए के टेंडर मिले, जबकि श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को 120.25 करोड़ रुपए के टेंडर दिए गए। दोनों कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों से मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया।
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कंपनी का नाम |
टेंडर वैल्यू |
विवरण |
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श्री गणपति ट्यूबवेल |
₹859.2 करोड़ |
31 टेंडर में L-1 बनकर काम हासिल |
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श्री श्याम ट्यूबवेल |
₹120.25 करोड़ |
73 टेंडर में सफल बोली |
22 अधिकारियों पर FIR, 10 गिरफ्तार
ACB ने इस मामले में महेश जोशी सहित कुल 22 अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें वित्तीय सलाहकार, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अन्य अधिकारी शामिल हैं। अब तक इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी जांच
इस घोटाले में इससे पहले जलदाय विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुबोध अग्रवाल को भी ACB ने गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और अब कार्रवाई पूर्व मंत्री महेश जोशी तक पहुंच गई। इससे संकेत मिलते हैं कि जांच अभी और बड़े स्तर तक जा सकती है।
कैसे खुला घोटाले का राज?
इस पूरे घोटाले का खुलासा शिकायतों और ईमेल के जरिए हुआ। फरवरी 2023 में सबसे पहले फर्जी टेंडर प्रक्रिया की शिकायत भेजी गई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मार्च 2023 में एक वकील ने भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन फिर भी मामला दबा रहा।
मई 2023 में फाइनेंशियल कमेटी की बैठक में आरोपों की जानकारी होने के बावजूद टेंडर पास कर दिए गए। बाद में ACB को सूचना मिली और 7 अगस्त 2023 को टीम ने कार्रवाई करते हुए कुछ अधिकारियों और दलालों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और पूरा नेटवर्क सामने आया।
घोटाले की पूरी टाइमलाइन
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तारीख |
घटना |
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फरवरी 2023 |
पहली शिकायत, कोई कार्रवाई नहीं |
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मार्च 2023 |
वकील ने शिकायत दी |
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मई 2023 |
आरोपों के बावजूद टेंडर पास |
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अगस्त 2023 |
ACB ने पहली गिरफ्तारी |
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सितंबर 2023 |
FIR दर्ज |
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मई 2024 |
CBI केस दर्ज |
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अक्टूबर 2024 |
22 लोगों पर FIR |
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अप्रैल 2025 |
ED ने जोशी को गिरफ्तार किया |
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मई 2026 |
ACB ने जोशी को गिरफ्तार किया |
जांच में एजेंसियों की भूमिका
इस मामले में ACB, ED और CBI तीनों एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर सबूत जुटाए और उन्हें ACB को सौंपा। वहीं CBI ने भी इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की। अब ACB मुख्य रूप से इस घोटाले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।











