एसिड अटैक पर SC सख्त, दुकानों में तेजाब की बिक्री पर लग सकता है बैन; CJI सूर्यकांत की पीठ ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते एसिड अटैक यानी तेजाब हमलों के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने खुदरा दुकानों पर तेजाब की बिक्री को बेहद सीमित करने या इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने की संभावना पर विचार किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों और प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। कोर्ट का फोकस तेजाब की आसान उपलब्धता रोकने और एसिड अटैक के पीड़ितों की सुरक्षा को मजबूत करने पर है।
17 साल पहले एसिड अटैक का शिकार हुए याचिकाकर्ता ने बताई पीड़ा
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने अपनी आपबीती अदालत के सामने रखी। वह खुद करीब 17 साल पहले एसिड अटैक का शिकार हुए थे। उन्होंने बताया कि तेजाब हमले का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका गहरा मानसिक प्रभाव भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमले के वर्षों बाद भी उन्हें नींद की गोलियों का सहारा लेना पड़ता है। याचिकाकर्ता ने बताया कि वह एक 14 वर्षीय बच्चे समेत कई अन्य एसिड अटैक पीड़ितों को भी जानते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय और सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ही उनकी आखिरी उम्मीद है।
'सरकार की गाइडलाइंस हो चुकी हैं पुरानी'
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह दलील भी दी गई कि तेजाब की बिक्री को लेकर सरकार की मौजूदा गाइडलाइंस अब पुरानी हो चुकी हैं। उनका कहना था कि सरकार की ओर से कई बार सख्त कदम उठाने के वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर तेजाब की बिक्री को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इसी वजह से खुदरा दुकानों पर तेजाब की बिक्री को पूरी तरह रोकने या इसे बेहद सीमित करने की मांग उठाई गई है।
पीड़ितों के इलाज और जागरूकता पर भी जोर
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के इलाज और उनके पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीरता दिखाई। अदालत ने कहा कि पीड़ितों को इलाज के दौरान घरेलू या अवैज्ञानिक उपचार पद्धतियों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि इस दिशा में गैर-सरकारी संगठन (NGOs) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। NGOs जागरूकता अभियान चलाकर पीड़ितों और उनके परिवारों को सही उपचार और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
तेजाब की आसान उपलब्धता पर रोक लगाने की जरूरत
एसिड अटैक के मामलों में तेजाब की आसानी से उपलब्धता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ऐसे हमलों को रोकने के लिए बिक्री, खरीद और भंडारण से जुड़े नियमों के प्रभावी पालन की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई में अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र और संबंधित प्राधिकरण तेजाब की खुदरा बिक्री को लेकर क्या जवाब देते हैं और अदालत आगे क्या निर्देश जारी करती है।




















