गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन:‘आजकल तेरे मेरे...’ वाली आवाज खामोश, मुंबई में होगा अंतिम संस्कार

संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी मृत्यु की वजह उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बताई जा रही हैं। उनकी करीबी मित्र ने बताया कि सुमन कल्याणपुर ने रात करीब 8 बजे अंतिम सांस ली।
आज होगा अंतिम संस्कार
जानकारी के अनुसार, सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह करीब 11:30 से 12 बजे के बीच मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू अग्नि है। पूरा संगीत जगत और उनके चाहने वाले इस क्षति से गहरे सदमे में हैं। सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक, हर जगह श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की श्रद्धांजलि
उनके निधन पर कई बड़े नेताओं और हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि सुमन कल्याणपुर की आवाज ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि उनके गाने कई भाषाओं और पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। पवार ने इसे संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत बताया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुमन कल्याणपुर की आवाज़ भारतीय संगीत की एक अमूल्य धरोहर थी। उन्होंने कहा कि छह दशकों से अधिक समय तक उन्होंने अपनी गायकी से लोगों के दिलों पर राज किया।
एक सुनहरी आवाज जिसने पीढ़ियों को जोड़ा
सुमन कल्याणपुर केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि एक पूरा संगीत युग थीं। उनकी आवाज में जो मिठास, सादगी और भावनात्मक गहराई थी, उसने कई पीढ़ियों को जोड़कर रखा। उनकी गायकी को अक्सर लता मंगेशकर की आवाज से तुलना किया जाता था। उन्होंने हिंदी, मराठी समेत कई भाषाओं में गाने गाए और अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया।
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करियर की शुरुआत और संगीत की राह
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के ढाका में हुआ था। बचपन से ही उनमें कला और संगीत के प्रति गहरा आकर्षण था। उन्होंने मुंबई के सेंट कोलंबस स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में चित्रकला की पढ़ाई शुरू की। धीरे-धीरे उनका झुकाव संगीत की ओर बढ़ता गया और उन्होंने इसे ही अपना जीवन बना लिया। उन्होंने कई महान गुरुओं से संगीत की शिक्षा ली, जिनमें पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और उस्ताद नवरंग जैसे नाम शामिल हैं। इस प्रशिक्षण ने उनकी गायकी को गहराई और परिपक्वता दी।
फिल्मी दुनिया में शानदार सफर
सुमन कल्याणपुर ने अपने करियर की शुरुआत 1950 के दशक में की थी। उनकी शुरुआती फिल्मों में ‘शुक्रची चांदनी’ और ‘मंगू’ (1954) जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार कई हिट गाने दिए। उनके गाए आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, ना ना करते प्यार, परबतों के पेड़ों पर, ना तुम हमें जानो और शराबी शराबी ये सावन का मौसम जैसे कई गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
11 भाषाओं में 3000 से अधिक गीत
रिपोर्ट के अनुसार, सुमन कल्याणपुर ने अपने करियर में लगभग 11 भाषाओं में 3000 से अधिक गीत गाए। इनमें फिल्मी गीतों के साथ-साथ भजन, ग़ज़ल, मराठी अभंग और भावगीत भी शामिल हैं।
मोहम्मद रफी के साथ यादगार जोड़ी
सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफी की जोड़ी को संगीत प्रेमियों ने खूब पसंद किया। दोनों की आवाजों में जो सामंजस्य था, उसने कई सुपरहिट गानों को जन्म दिया। उनकी गायकी का यह सहयोग भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर का हिस्सा माना जाता है।
सम्मान और उपलब्धियां
अपने लंबे और सफल करियर में सुमन कल्याणपुर को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें 2023 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था, जो भारतीय सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक उच्च नागरिक सम्मान है। उनकी उपलब्धियां केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उनका असली सम्मान उनके श्रोताओं के दिलों में था।











