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त्योहारों से पहले महंगी हुई चीनी! दिल्ली से मुंबई तक 15% तक बढ़े दाम, जानें वजह

त्योहारों से पहले देश में चीनी की कीमतें बढ़ने लगी हैं। जो दिल्ली से लेकर मुंबई तक पहुंच गई है। देश में अचानक चीनी की कीमते बढ़ने की वजह क्या है। आइए जानते हैं।
त्योहारों से पहले महंगी हुई चीनी! दिल्ली से मुंबई तक 15% तक बढ़े दाम, जानें वजह
त्योहारों से पहले देश में चीनी की कीमतें बढ़ने लगी हैं। दिल्ली में चीनी 49 रुपये, मुंबई में 52 रुपये और पश्चिम बंगाल में 55 रुपये किलो तक पहुंच गई है।

देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत होने में अभी थोड़ा समय बाकी है, लेकिन उससे पहले ही चीनी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली से लेकर मुंबई और पश्चिम बंगाल तक चीनी के दाम में पिछले एक महीने में करीब 8 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में मिठाई, बेकरी और दूसरी चीनी से बनने वाली चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

दिल्ली से मुंबई तक बढ़े चीनी के दाम

चीनी की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी कई बड़े शहरों के बाजारों में देखने को मिल रही है। दिल्ली में जहां करीब एक महीने पहले चीनी 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब इसका भाव बढ़कर करीब 49 रुपये प्रति किलो हो गया है। मुंबई में भी कीमतों में बड़ा उछाल आया है। यहां चीनी का भाव 46 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 52 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वहीं पश्चिम बंगाल में चीनी करीब 55 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है।

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त्योहारों की वजह से बढ़ी मांग

अगस्त से देश में त्योहारी सीजन शुरू हो जाता है, जो दिसंबर तक चलता है। इस दौरान रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा, दिवाली और क्रिसमस जैसे कई बड़े त्योहार आते हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा केक, पेस्ट्री, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक और दूसरी चीजों में भी चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसी वजह से बाजार में चीनी की थोक खरीदारी अभी से बढ़ने लगी है। मांग बढ़ने के साथ कारोबारियों और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों ने चीनी का स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसका असर बाजार में कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

30 साल के सबसे निचले स्तर पर स्टॉक

चीनी की कीमत बढ़ने की एक बड़ी वजह इसका कम स्टॉक भी बताया जा रहा है। पिछले सीजन में चीनी का उत्पादन कम रहा था। इसके अलावा करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात भी किया गया। अनुमान के मुताबिक 1 अक्टूबर तक चीनी मिलों के पास करीब 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच सकता है। यह पिछले करीब 30 साल में सबसे कम स्तर बताया जा रहा है। कम स्टॉक के कारण बाजार में आगे कीमत बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में चीनी मिलें और कारोबारी बाजार में स्टॉक को धीरे-धीरे जारी कर रहे हैं। इससे उपलब्धता पर दबाव बढ़ रहा है।

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कम बारिश और मौसम भी बना वजह

चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे मौसम को भी एक कारण माना जा रहा है। अल-नीनो और जून-जुलाई में देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। वहीं माल ढुलाई और परिवहन का खर्च बढ़ने से भी चीनी की कीमत पर दबाव पड़ा है।

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सरकार ने उठाए सख्त कदम

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कारोबारियों पर 30 नवंबर 2026 तक स्टॉक लिमिट लागू कर दी है। इसके तहत व्यापारी एक बार में 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। सरकार का मकसद इस कदम के जरिए जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। इसके अलावा घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर भी रोक लगा रखी है। अब आने वाले महीनों में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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