भोपाल:मीडिएशन के लिए एक्सपर्ट की मदद का प्रयोग रहा सफल, प्रदेश में इस साल अब तक 179 मामलों में सुलह

पारिवारिक विवाद में छोटी सी युक्ति भी घर जोड़ने में मददगार साबित हो सकती है। बीते कुछ सालों में प्रदेश के फैमिली कोर्ट और मीडिएशन सेंटर्स में इसके अनेक उदाहरण नजर आए हैं। इसी सफलता में एक नई पहल और जुड़ चुकी है। यह है विषय विशेषज्ञों की मदद लेकर दी जा रही समझाइश। प्रदेश में यह प्रयोग बेहद सफल रहा है।
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मीडिएशन के लिए एक्सपर्ट की मदद का प्रयोग रहा सफल, प्रदेश में इस साल अब तक 179 मामलों में सुलह
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पल्लवी वाघेला, भोपाल। यह मामले सीधे मीडिएशन या फिर कोर्ट या थाने के माध्यम से मीडिएशन के लिए पहुंचे थे। इनमें सबसे अधिक मामले मेडिकल फील्ड से जुड़े हैं, जिनमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां शामिल हैं। इसके अलावा फाइनेंशियल सेक्टर, स्पेशल चाइल्ड के मामले आदि में भी विषय विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। विशेषज्ञों की काउंसलिंग और तकनीकी सलाह कई परिवारों को दोबारा एक साथ लाने में कारगर साबित हुई है। इस साल अब तक एक्सपर्ट की मदद से प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में समझौते होने के 179 मामले प्रकाश में आए हैं।

मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह से बचा परिवार

भोपाल निवासी दंपति की शादी 11 साल पहले हुई थी। करीब पांच साल पहले पति में सोरायसिस के लक्षण नजर आने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पत्नी, पति के पास बैठने तक से कतराने लगी और बच्चे को भी दूर रखने लगी। मामले में कोर्ट द्वारा चर्म रोग विशेषज्ञ की मदद से पत्नी की काउंसलिंग कराई गई। उन्होंने पत्नी को समझाया कि सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है और बच्चे में वंशानुक्रम की संभावना इस मामले में बहुत कम है। उन्होंने यह भी समझाया कि इसे दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है। इसके बाद दंपति में समझौता हुआ।

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वित्तीय विवाद का निकला समाधान

इंदौर के दंपति में वित्तीय समस्या को लेकर विवाद था। दोनों अपना-अपना बिजनेस करते हैं और यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। शादी के डेढ़ साल में ही बात तलाक तक जा पहुंची। ऐसे में दोनों को फाइनेंस एक्सपर्ट के सामने बात कराई गई। पारिवारिक और आर्थिक दोनों समस्याओं का एक साथ हल मिलने पर बात बन गई। इसके बाद कपल ने राजीनामा कर लिया और विवाद खत्म हो गया।

काउंसलिंग से सुलझा संपत्ति विवाद

जबलपुर में पिता और पुत्र के बीच कहासुनी इतनी बढ़ी कि मामला संपत्ति के विवाद तक जा पहुंचा। इसमें रिलेशनशिप एक्सपर्ट और मनोचिकित्सक से दोनों को मिलाकर क्रमबद्ध काउंसलिंग की गई। बातचीत और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से दोनों पक्षों के बीच संवाद हुआ। नतीजा सकारात्मक रहा और परिवार को टूटने से बचाया जा सका। यह मामला मीडिएशन की सफलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की ली जा रही मदद

मेडिकल फील्ड फिजिकल इश्यू के 83 मामलों में विशेषज्ञों की सहायता ली गई। फाइनेंशियल फील्ड के 47, साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट के 18, स्पेशल चाइल्ड एक्सपर्ट के 12 और मेडिकल फील्ड मेंटल हेल्थ के 19 मामलों में विशेषज्ञों की भूमिका रही। इन मामलों में तकनीकी जानकारी और सही परामर्श ने समझौते की राह आसान बनाई। विशेषज्ञों की मौजूदगी से पक्षकारों को अपनी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।

चार प्रमुख जिलों में दिखा सकारात्मक असर 

भोपाल में 59, इंदौर में 47, जबलपुर में 51 और ग्वालियर में 22 मामलों में समझौते हुए हैं। मीडिएशन में विषय विशेषज्ञों की भागीदारी कई मामलों में विवाद सुलझाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना रही है। विशेष रूप से मेडिकल क्षेत्र से जुड़े मामलों में तकनीकी जानकारी, गलतफहमियां और भावनात्मक तनाव दोनों मौजूद रहते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के साथ-साथ पक्षों के बीच संवाद का पुल बनाने का काम करते हैं। इसी तरह अन्य क्षेत्र जैसे साइबर, स्पेशल चाइल्ड काउंसलिंग आदि में भी एक्सपर्ट की मदद कारगर साबित होती है। मीडिएशन सेंटर प्रभारी प्रतिभा राजगोपाल ने बताया कि-विषय विशेषज्ञों की भागीदारी से विवादों के मूल कारणों को समझने और उनका व्यावहारिक समाधान निकालने में सहायता मिल रही है। यही कारण है कि मीडिएशन सेंटरों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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